लापता बच्चे हो रहे शोषण और तस्करी के शिकार

ये आंकड़े सरकारी एजेंसियों से प्राप्त किए गए हैं। बीबीए ने अपनी किताब (मिसिंग चिल्डेन आफ इंडिया) में कहा है कि इसने ये आंकड़ें 392 जिलों में आरटीआई दायर कर हासिल किए हैं। इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआसी) के महानिदेशक सुनील कृष्ण ने कहा कि पुलिस और कानूनी एजेंसियां इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेतीं।
लापता होने वाले बच्चों से संबंधित आंकड़े इकठ्ठा करने और बांटने वाली एजेंसिया ना के बराबर है। बीबीए ने अपनी एक वेबसाइट भी शुरू की है जहां इन बच्चों से संबंधित आंकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं। लेकिन मुद्दे की बात यह है कि इसपर सरकार का क्या रूख है। इतनी बड़ी संख्या में इन बच्चों का क्या किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या को किस कोने में छुपा कर रक्खा गया है।












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