टैटू गुदवाने वालों को नहीं मिलेगी सेना में नौकरी

अखनूर पहुंचे डिप्टी डायरेक्टर जनरल रिक्रूटमेंट (जेएंडके व पंजाब) ब्रिगेडियर विनोद कुमार रायजादा ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जिन युवाओं के शरीर पर स्थायी टैटू गुदे हैं, उन्हें अस्थायी तौर पर रैली से बाहर कर दिया गया है। ऐसे युवकों को रैली स्थल में आने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि युवक टैटू हटाने के बाद ही रैली में भाग ले पाएंगे और जिनके स्थायी टैटू गुदे हैं, उन्हें विभिन्न रक्त जांच से गुजरना होगा। ब्रिगेडियर रायजादा ने कहा कि टैटू कई खतरनाक बीमारियों का कारण बन रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आदेश को अखनूर रैली में सख्ती के साथ लागू किया जा रहा है। इस संबंध में तमाम भर्ती केंद्रों को आवश्यक निर्देश भेज दिए गए हैं, ताकि इस नियम का कड़ाई से पालन हो सके। उन्होंने माना कि इस आदेश से कुछ युवकों को मायूसी हुई है, लेकिन इसके चलते हम स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। ब्रिगेडियर ने बताया कि रैली में पहुंचे 15 हजार युवाओं में से 30 फीसदी के शरीर पर टैटू गुदे हुए थे और उन्हें वापस भेज दिया गया।
ब्रिगेडियर रायजादा के अनुसार सैनिक (तकनीकी वर्ग) की भर्ती में जम्मू का रिस्पांस काफी कमजोर है, इसलिए यह फैसला लिया गया है कि भविष्य में जम्मू-कश्मीर के जिस भी भर्ती केंद्र में भर्ती अभियान का आयोजन होगा, उसमें सैनिक (तकनीकी वर्ग) की भर्ती में रियासत के किसी भी जिले का युवक भाग ले सकेगा। फैशन और कुछ अलग दिखने की तमन्ना से शरीर के विभिन्न हिस्सों में टैटू गुदवाने वाले युवक आज अपने इस शौक को कोसते नजर आए।
सांबा इलाके से पहुंचे ऐसे ही युवक राजेश शर्मा का कहना था कि अन्य युवकों को टैटू बनवाता देख उसने भी शौकिया अपनी बांह पर टैटू गुदवा लिया था, लेकिन आज भर्ती रैली में भाग लेने से वंचित रहने पर उसे इसका अफसोस हो रहा है। टैटू के कारण रैली में भाग लेने से वंचित रहने वाले युवकों का कहना था कि सैन्य अधिकारियों को उन्हें रैली में भाग लेने का मौका दिया जाना चाहिए और उसके बाद चयनित होने पर मेडिकल जांच करवाई जानी चाहिए। यदि इससे उनके शरीर में बीमारी के कोई लक्षण मिलते हैं तो उनका चयन रद कर दिया जाना चाहिए। अचानक इस तरह का नियम लागू होने से उन्हें निराशा हुई है।












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