एफडीआई रुका तो चल पड़ी संसद की कार्रवाई

Parliament
दिल्‍ली। संसद में बुधवार को नजारा पिछले 9 दिनों से बिल्‍कुल अलग नजर आ रहा था। न तो आज संसद में हंगामा हो रहा था और न ही कोई विरोध में संसद से निकल बाहर सड़क पर निकल विरोध के लिए जा रहा था। सारा काम सुचारू रूप से हो रहा था। यह सब सरकार के एफडीआई को रोकने की वजह से ही संभव हो पाया है। सत्ता पक्ष के विभिन्न दलों और विपक्ष के भारी दबाव के आगे झुकते हुए सरकार ने आज ऐलान किया कि वह खुदरा एफडीआई पर फैसला स्थगित कर रही है। इस घोषणा के बाद नौ दिन से हंगामे का मंजर देख रही संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पडी।

संसद का गतिरोध समाप्त करने पर सहमति आज सुबह सर्वदलीय बैठक में बनी। सरकार ने पेशकश की कि वह मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले को फिलहाल रोक रही है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने लोकसभा में ऐलान किया कि सरकार एफडीआई पर फैसला तब तक के लिए टाल रही है। जब तक सभी संबद्ध पक्षों के बीच आम सहमति न बन जाए। राज्यसभा में इसी तरह का बयान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने दिया। मुखर्जी ने कहा कि संबद्ध पक्षों में राजनीतिक दल और राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। जिन्हें शामिल किये बिना यह फैसला लागू नहीं किया जा सकता।

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार जनता की इच्छा के आगे झुकी है और जनता की इच्छा के आगे झुकना हार नहीं है। नेता सदन मुखर्जी के बयान के बाद अध्यक्ष मीरा कुमार ने भाजपा, वाम और बसपा सहित विभिन्न दलों की ओर से पेश कार्य स्थगन प्रस्ताव नामंजूर कर दिये, जिसके विरोध में बसपा सदस्यों ने वाकआउट किया। उसके बाद इस शीतकालीन सत्रा में पहली बार प्रश्नकाल शुरू हुआ। यह सत्रा 22 नवंबर को शुरू हुआ था।

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