दबंगों ने रूकवाई दलित युवक की हाथी पर निकासी

Haryana: A Dalit man, can not allowed Elephant Ride
भिवानी। भले ही देश व समाज ने कितनी ही तरक्की की हो मगर आज भी समाज में रूढि़वादी परंपराएं पूरी तरह से हावी दिखाई देती हैं। चाहे अंतर्जातीय विवाह होते हों या फिर यूं कहा जाए कि इंटरनेट के जरिए ही चाहे रिश्ते होते हों मगर इसके बावजूद जातिवाद हावी दिखाई देता है। भिवानी के गांव देवसर में दबंगों की दबंगई ने एक शादी के रंग में भंग डाल दिया।

भिवानी जिले के गांव देवसर में दलित समुदाय के वीरभान नामक युवक की शादी नयागांव निवासी मौसम के साथ होनी थी। आज ही बारात सजानी थी मगर बारात जाने से पूर्व गांव में घुड़चढ़ी यानी निकासी की रसम अदा की जानी थी। यहां निकासी किसी घोड़ी पर नहीं बल्कि हाथी पर निकाली जानी थी। पूर्व निर्धारित योजना के मुताबिक निकासी शुरू करने के लिए युवक को हाथी पर बैठाया जाने लगा तो गांव के ही स्वर्ण जाति के दर्जनों युवक आए व दुल्हे को हाथी पर बैठने से मना किया।

उन्होंने ऐसा किए जाने पर परिवार को ही जान से मारने की धमकी दी। महावत के साथ भी इन युवकों द्वारा हाथापाई की गई। यहीं नहीं हाथी के ऊपर रखा गया गलीचा भी फैंक दिया गया। युवक की निकासी रोक दी गइ व पैदल ही उसकी निकासी निकाली गई। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई तो गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई मगर तब तक शादी के रंग में भंग पड़ चुका था।

दुल्हे वीरभान का कहना था कि उसकी निकासी दबंगों ने नहीं निकलने दी। उसकी मांग विमला व बहन का कहना था कि दबंगों की दबंगई के चलते उनकी शादी में खलल पड़ा है। यहां तक कि आरोपी युवक जो कि गांव के ही राजपूत बिरादरी के थे, उन्हें जान से मारने की धमकी भी देकर गए। वीरभान के रिश्तेदारों व दूसरे परिजनों का भी कुछ ऐसा ही कहना था।

गांव की सरपंच सुनीता की जगह सरपंची देख रहे उनके पति जसवंत का कहना था कि उन्हें भी मामले बारे जानकारी मिली तो उन्होंने पुलिस बल को गांव में बुलाया। उनका कहना था कि दोबारा ऐसा नहीं होगा। साथ ही उनका ये भी कहना था कि गांव में पंचायत का आयोजन कर शादी में विघ्र डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर पुलिस ने गांव में तनाव होने की बात मानी व घटना की पुष्टि की मगर साथ ही ये भी कहा कि जब तक पुलिस पहुंची थी, आरोपी जा चुके थे।

अब मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। बहरहाल मामले को लेकर गांव में तनाव बना हुआ था। दलित समुदाय के लोगों में रोष मिश्रित क्रोध था व उनका कहना था कि लोकतंत्र में सबको समान अधिकार होने के बावजूद उन्हें निकासी ना निकालने दिया जाना दबंगों की दबंगई दिखाता है। कहना ना होगा कि दबंगों की दबंगई के चलते एक शादी में खलल पड़ गया व दुल्हे को पैदल ही अपनी निकासी की रसम निभानी पड़ी।

ये मामला कोई नया मामला नहीं है। इससे पूर्व करीब आठ साल पहले गांव जाटू लुहारी में दलित समुदाय के सुरेन्द्र नामक द्वारा घुड़चढ़ी निकाले जाने पर दबंगों ने खूब हंगामा मचाया था। युवक को गांव ही छोडऩा पड़ा था। इस नए मामले ने एक बार फिर से उस मामले की ना केवल याद ताजा कर दी है बल्कि इक्कीसवीं सदी के हाईटक युग को भी ठेंगा दिखा दिया है। भले ही करतूत कुछ असामाजिक या शरारती तत्वों की हो मगर उससे कालिख तो समूचे सभ्य समाज के माथे पर ही पुतती है।

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