कुशवाहा के राइट हैण्ड मायावती के निशाने पर

ज्ञात हो कि रामचन्द्र सिंह प्रधान विधान परिषद सदस्य भी हैं तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने भी उन्हें पीसीएफ का सभापति निर्वाचित कराया था। प्रधान को कुर्सी से हटाने की मुहिम छेडऩे का मुख्य मकसद कुशवाहा के ही कटे हुए परों को और कतरना है। कुशवाहा को मंत्री पद से हटाने के बाद जिस तरह उनके आवास खाली कराया गया, उससे यह जाहिर है कि कुशवाहा के खिलाफ अभी और कार्रवाई की जा सकती है।
प्रधान इसी कार्रवाई का प्रमाण है। प्रधान न सिर्फ कुशवाहा के करीबी है बल्कि कुशवाहा द्वारा ही उन्हें यह कुर्सी दी गयी। यह माना जा रहा है कि प्रधान अभी उन्हें लाभ पहुंचा सकते हैं। प्रधान को हटाने के लिए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लाया गया है। कुशवाहा के सत्ता में रहते प्रधान पर कभी एक उंगली भी उठाने की हिम्मत नहीं की गयी वहीं अविश्वास प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रधान सभापति के रूप में प्रधान संचालक मंडल की बैठक नहीं बुलाते हैं। वहीं प्रधान इन आरोपों को निराधार बात रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो जल्द ही रामचंद्र प्रधान को हटाया जा सकता है। वहीं कुशवाहा के अन्य करीबियों की भी सूची तैयार की गयी है, जिन पर गाज गिरनी तय है। प्रदेश के इलाहाबाद जिले में भी कुशवाहा का समर्थन करने वाले 40 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इन चालीस लोगों पर आरोप है कि वह बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।












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