माया के करीबी नसीमुद्दीन भी लोकायुक्त के घेरे में

मंत्री के बड़े भाई जमीरुद्दीन सिद्दकी के दामाद फिदा हुसैन जो पहले कबाड़ का धंधा करते थे, वह अब करोड़ों की ठेकेदारी कर रहे हैं। अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए इस मंत्री ने फ्री-होल्ड किये जाने का प्रस्ताव पारित कराया और फ्री-होल्ड की कार्रवाई शुरू कर दी। कबीना मंत्री पर यह भी आरोप हैं कि उन्होंने बुंदेलखण्ड को अवैध कारोबार की मंडी बना दिया। अवैध खनन, लोक निर्माण विभाग की सड़कों, पुलों, बुंदेलखण्ड पैकेज, कांशीराम शहरी गरीब आवसीय योजना आदि में लूट व केन्द्रिय विकास बजट में धन की बंदरबाट कर उन्होंने धन अर्जित किया।
लोकायुक्त को यह भी शिकातय मिली है कि कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने वर्ष 1970 के दशक के अंतिम वर्ष और 1980 के दशक में प्रारंभिक तीन वर्षों के मध्य अवधि में होमागार्ड के पद से अपने भविष्य की शुरुआत की थी। वर्ष 1988-89 में बांदा नगर पालिका के अध्यक्ष पर पर चुनाव लड़ा था पर जीत नहीं सके थे। इसके बाद इन्होंने नगर पालिका में ठेकेदारी करनी शुरू कर दी। बसपा नेता बाबू सिंह कुशवाहा इन्हें बसपा में लेकर आये। बांदा विधानसभा से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ाया और जिताया।
वर्ष 1995 में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार में मंडी परिषद के अध्यक्ष बनाये गये। उसी समय उन्नाव मंडी जमीन घोटाले में गबन को लेकर इनकी आरसी जारी की गयी जिसमें इनकी अकूत सम्पत्ति की कुर्की की गयी थी। वर्ष 2011 में इनकी पत्नी हुसना सिद्दकी एमएलसी निर्वाचित हुईं। कैबिनेट मंत्री बनने के बाद श्री सिद्दकी ने अपने पैतृक गांव में आलीशान मकान बनवाया। धीरे-धीरे अकूत सम्पत्ति जमा कर इन्होंने करीब नौ आलीशान कोठियां बनवा लीं।












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