पुराने प्यादों के सहारे नयी जंग जीतने की कोशिश में भाजपा

खबर यह भी है कि कुछ बड़े नेताओं के पुत्रों को भी टिकट मिल सकता है। दिल्ली में कई दौर की बैठक के बाद यह तय किया गया है कि मौजूदा 48 विधायकों को टिकट दिया जायेगा। लेकिन आशंका यह भी है कि इन 48 विधायकों की सूची से दो-तीन नाम कट भी सकते हैं। वहीं कुछ नेता पुत्रों के नाम भी लिस्ट में शामिल हैं लेकिन अभी उन पर अंतिम मोहर नहीं लगी है। ज्ञात हो कि पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन, ओमप्रकाश सिंह सहित कई नेता हैं जो अब अपनी अगली पीढ़ी को राजनीति में सक्रिय करने में लगी है।
इन नेताओं की पूरी कोशिश है कि इन पुत्रों को इस बार मैदान में उतारा जाये। वहीं भाजपा की सूची में मौजूदा विधायकों को अधिक अहमियत दिये जाने के पीछे राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सपा व कांग्रेस सहित अन्य कई दलों द्वारा मौजूदा विधायकों को टिकट न दिये जाने पर कलह मची है। इसका असर पार्टी के चुनावी प्रचार पर भी पड़ रहा है। वहीं रूठे नेता टिकट के लिए अन्य दलों में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में भाजपा ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। प्रदेश में अपने खोये वजूद को तलाश रही भाजपा की मजबूरी या अकलमंदी यही है कि वह पुराने प्यादों के सहारे ही नयी जंग जीतने की कोशिश करे।












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