सिगरेट पर निर्देशः अंबिका-गुलाम भिड़े

क्योंकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को औपचारिक रुप से बता दिया है कि वह ये निर्देश फिल्मों पर लागू नहीं करेगा। ये कानून विदेशी और देसी दोनों फिल्मों पर लागू हैं, लेकिन यह कानून फिल्म उद्योग से जुड़े कुछ लोगों को रास नहीं आया और उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पर इस कानून को हटाने के लिए दबाव डालना शुरू किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों की माने तो बुधवार रात 11 बजे स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव केशव देसीराजू, संयुक्त सचिव शालिनी प्रसाद समेत दर्जनों अधिकारियों को घरों में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी ने पत्र पहुंचाकर इस कानून पर रोक लगाने की सूचनादी। अधिकारी इस बात से हैरान हैं कि रात में इस बाबत क्यों पत्र भेजा गया।
अधिकारियों का कहना है कि इस कानून को बदलने या रोक लगाने का अधिकार सिर्फ स्वास्थ्य मंत्रालय और उच्चतम न्यायालय को है, क्योंकि अधिसूचना इसी मंत्रालय ने की है। इतना ही नहीं, उच्चतम न्यायालय ने कानून बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को अधिकृत किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कानून को लेकर सूचना एवं प्रसार मंत्रालय की बेचैनी का पता चल रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विरोध पर स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कानून की बारीकियों को समझने और सलाह लेने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया है।
फिल्मों व टीवी को लेकर क्या है मामला
केंद्र सरकार द्वारा तंबाकू नियंत्रण कानून में ताजा संशोधन के अनुसार, पुरानी फिल्मों और टेलीविजन के कार्यक्रमों में तंबाकू संबंधित चेतावनी देनी होगी। फिल्म या टेलीविजन कार्यक्रमों की शुरुआत और मध्य में कम से कम तीस सेकेंड तक तंबाकू रोधी स्वास्थ्य स्पॉट या संदेश निश्चित रूप से चलाने होंगे।
सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग के फांट से धूम्रपान से कैंसर होता है या धूम्रपान जानलेवा है चेतावनियां लिखनी होगी। नए नियमों के तहत चबाने वाले तंबाकू के लिए भी चेतावनी लिखनी होगी। स्वास्थ्य चेतावनियां उसी भाषा में होंगी जिस भाषा में फिल्म या कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे होंगे। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी होने से पहले सेंसर बोर्ड से प्रमाणित फिल्मों और टेलीविजन कार्यक्रमों को पुरानी श्रेणी में रखा है।












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