बढ़ सकते है रसोई गैस और सीएनजी के दाम

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नई दिल्ली। बिजली और खाद कंपनियों को घरेलू उत्पादकों से प्राकृतिक गैस खरीदने के लिए करीब 3,400 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ सकता है क्योंकि सरकार ने इधन की कीमत अमेरिकी डालर में तय की है और इसमें भारतीय रुपए के मुकाबले भारी बढ़ोतरी हुई है।

डालर के मुकाबले रुपए के 52 के स्तर से भी नीचे आने के साथ बिजली और उर्वरक कंपनियां रिलायंस इंड्रस्टीज और सरकारी कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को रोजाना करीब 10 करोड़ रुपए अधिक का भुगतान कर रही हैं। ये कंपनियां बिजली और यूरिया उत्पादन के लिए रोजाना करीब नौ करोड़ घन मीटर गैस खरीदती हैं।

उद्योग सूत्रों ने बताया कि घरेलू गैस की कीमत 4.2 डालर प्रति एमएमबीटीयू पर बरकरार है लेकिन रुपया 52 के स्तर को पार कर गया है जो कुछ महीने पहले 45 रुपए पर था। रिलायंस को सालाना स्तर पर इससे 1,584 करोड़ रुपए और ओएनजीसी को 1,826 करोड़ रुपए का फायदा होगा।

सूत्रों ने बताया कि ओएनजीसी और आरआईएल को होने वाले इस अप्रत्याशित लाभ का बोझ मूल रूप से उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है जिन्हें बिजली और उर्वरक के लिए ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ रही है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि घरेलू गैस और सीएनजी के दाम बढ़ सकते है क्‍योकि अगर कंपनियों को ज्‍यादा व्‍यय करना पड़ेगा तो ग्राहको पर भी भार ड़ाल सकती है।

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