सांसद चाहें उच्च रैंक औऱ लालबत्ती
दिल्ली
(ब्यूरो)। सांसद को भी उच्च रैंक औऱ लालबत्ती की जरूरत है। हालांकि विशेषाधिकार के तहत सांसदों को काफी कुछ मिला हुआ है पर अब संसद की एक विशेषाधिकार समिति ने सांसदों के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के बराबर दर्जा दिए जाने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि सांसदों को भी अपने वाहनों पर लालबत्ती लगाने की इजाजत मिलनी चाहिए। समिति ने बुधवार को लोस में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्षों को केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों तथा लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं के समान पूर्वता अधिपत्र (वारंट ऑफ प्रीसिडेंस) में सातवें नंबर पर रखा जाना चाहिए। id="toptextpromo">इस
समय लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पूर्वता अधिपत्र का हिस्सा नहीं हैं जबकि लोकसभा अध्यक्ष को भारत के प्रधान न्यायाधीश के साथ छठे नंबर पर रखा गया है। पीसी चाको की अध्यक्षता वाली समिति ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि सांसदों को वारंट ऑफ प्रीसिडेंस में सबसे अंत में 21वें स्थान पर रखा गया है जो उनके दर्जे से बहुत अधिक नीचे है और यहां तक कि नौकरशाहों से भी कम है। समिति ने कहा है कि सांसदों को पूर्वता अधिपत्र में उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, कैट, अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्षों के समान रखा जाए। id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'> id='top-searched-articles'>17वें
नंबर पर आने से सांसद राज्य सरकारों के कैबिनेट मंत्रियों से ऊपर रहेंगे जो 18वें नंबर पर हैं। समिति ने सांसदों के साथ व्यवहार में सरकारी अधिकारियों द्वारा गरिमापूर्ण व्यवहार नहीं किए जाने तथा प्रोटोकाल उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं का भी संज्ञान लिया है। विशेषाधिकार समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, लोकसभा सदस्यों द्वारा प्रोटोकाल के उल्लंघन के बारे में लोकसभा सचिवालय में काफी संख्या में शिकायत दर्ज कराई गई हैं। समिति का मानना है कि केंद्र सरकार के अनेक मंत्रालयों और विभागों द्वारा समय-समय पर विभिन्न विषयों पर परिपत्रों के समेकित करने की अत्यधिक आवश्यकता है और सभी सरकारी अधिकारियों के एक बार नोटिस में लाने के बाद इसके दोहराए जाने की जरूरत है।











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