माया ने केन्द्र के पाले में फेंकी एक और गेंद

मायावती ने भेजे अपने पत्र मेंं कहा है कि 1995 में उनकी पहली बार सरकार बनने पर मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए पिछड़े वर्ग का जाति प्रमाण पत्र दिया गया था। शैक्षिक संस्थाओं को अल्पसं यक संस्था घोषित करने के लिए उनकी सरकार में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान प्राधिकरण विधेयक 2011 प्रस्तावित किया गया है जो केन्द्र सरकार के अनुमोदन के लिए अभी भी लम्बित है।
पत्र में कहा गया है कि गत 24 नवम्बर को लिखे अपने पत्र में उन्होंने 11 सितम्बर के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि इस पत्र के माध्यम से उन्होंने अल्पसंख्यक विशेषकर मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण की व्यवस्था के लिए विचार करने के लिये लिखा था
जिसका जवाब केन्द्र सरकार से २३ अक्टूबर को प्राप्त हुआ।मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेन्ट प्लान की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा है कि केन्द्र सरकार ने इस योजना के तहत 1015.70 करोड़ रुपये की राज्य सरकार की योजना को स्वीकृत प्रदान की लेकिन इस योजना में केन्द्र ने अभी तक 634.08 करोड़ रुपये की सहायता ही प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब तक इस योजना में राज्यांश के रुप में 97.24 करोड़ रुपये अवमुक्त कर चुकी है जबकि केन्द्र सरकार से अभी भी 381 करोड़ रपये प्राप्त होने शेष हैं।
उन्होंने कहा कि अवशेष धनराशि प्राप्त न होने के कारण स्वीकृत कार्यो को पूर्ण करने में कठिनाई आ रही है। ज्ञात हो कि इससे पहले मुख्यमंत्री के मुस्लिमों को आरक्षण देने सम्बन्धी पत्र के जवाब में प्रधानमंत्री ने इसे राज्य का अधिकार बताते हुए मुस्लिम आरक्षण को लेकर केन्द्र सरकार ने गेंद मायावती सरकार के पाले में वापस कर दी थी। मायावती ने पिछडे मुलसमानों, गरीब सवर्णो और जाटों को आरक्षण दिये जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन ङ्क्षसह को पत्र लिखा था। इस पत्र का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने कह दिया कि मुसलमानों को राज्य सरकार आरक्षण दे सकती है।












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