स्टैडिंग कमेटी के लोकपाल बिल से टीम अन्ना खफा

जबकि न्यायपालिका और सांसदों को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की पैरवी की है। हजारे पक्ष संपूर्ण नौकरशाही, न्यायपालिका और प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर जोर देता रहा है। किरण ने कहा कि न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे से बाहर रखना लोगों की मांगों के लिए झटका है क्योंकि लोग न्यायपालिका को इसके दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। किरण ने एनजीओ, कॉरपोरेट और मीडिया को भी लोकपाल के दायरे में लाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है।
आपको बता दें कि सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने किरण बेदी पर लगे आरोपों को पर सफाई देने के लिए एक प्रेस वार्ता की थी। केजरीवाल ने साफ तौर पर किरण बेदी पर लगे सारे आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया और जिस जज ने बेदी पर मुकदमा दर्ज करने की बात कही है उसके खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया।
केजरीवाल ने कहा कि यह बानगी है कि जज भ्रष्ट हैं और उन्होंने जानबूझकर बेदी पर आरोप लगाकर केस दर्ज करने की बात कही है। इसलिए वो और उनकी टीम चाहती है कि न्यायपालिका भी लोकपाल के दायरे में हो।












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