कारगिल युद्ध: बाजपेयी को आईबी ने एक साल पहले ही कर दिया था अलर्ट

Former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee
दिल्‍ली। सेना के एक वैचारिक संगठन ने यह दावा किया है कि 1999 में हुए कारगिल युद्ध से करीब एक साल पहले खुफिया ब्‍यूरो (आईबी) ने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से इसकी आशंका जताई थी। आईबी ने इस बात की जानकारी दी थी कि कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्‍तान की साजो सामान संबंधी तैयारियों के बारे में बाजपेयी को सूचना दी थी। उसके बाद भी सरकार घुसपैठ रोक पाने से चूक गई और कारगिल युद्ध जैसा परिणाम सामने आया।

सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज की अध्‍यन में कहा गया है कि 2 जून 1998 को ही आईबी ने पीएम को एक नोट भेजा था। इस नोट में कारगिल के सामने वाले क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्‍तान की घुसपैठ करने का ब्‍यौरा था। अध्‍ययन की मानें तो यह अनुमान लगाया गया था कि परमाणु शक्ति से संपन्‍न होने के बाद पाकिस्‍तान कारगिल में भाड़े के सैनिक भेज सकता है। इस नोट पर उस समय के आईबी प्रमुख के हस्‍ताक्षर भी थे।

स्टडी 'पेरिल्स ऑफ प्रिडिक्शन, इंडियन इंटेलिजेंस ऐंड द करगिल क्राइसिस' में कहा गया कि रिसर्च ऐंड अनैलेसिस विंग (रॉ) ने भी अक्टूबर 1998 के अपने आकलन में आगाह किया था कि पाकिस्तानी सेना गठबंधन के अपने सहयोगियों की संभावित मदद के साथ एक सीमित लेकिन तेज हमला कर सकती है। इस स्टडी में कहा गया कि आमतौर पर विश्वसनीय मानी जाने वाली रॉ की इस रिपोर्ट में जंग की आशंका असंगत नजर आई। लिहाजा, तुरंत सेना ने सवाल किए।

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