51 प्रतिशत एफडीआई यानी 51 लाख नौकरियां

Retail Sector to bring 51 lakhs jobs in India
बेंगलुरू (अजय मोहन)। रिटेल सेक्‍टर में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश के केंद्र सरकार के निर्णय पर देश भर में विरोध हो रहा है। क्‍या आपको पता है ये कौन लोग हैं, जो विरोध कर रहे हैं? ये वो लोग हैं, जो विपक्षी दलों से ताल्‍लुक रखते हैं, ये वो लोग हैं, जिनके सुपरस्‍टोर गली-मुहल्‍लों में चल रहे हैं, वे लोग, जो लघु उद्योग के माध्‍यम से बिग बाजार और स्‍पेंसर्स जैसे रिटेलर्स को अपना माल सप्‍लाई करते हैं। और वे लोग जिन्‍हें इसकी गहराई के बारे में पता नहीं है। सरकार का दावा है कि इससे 1 करोड़ लोगों को नौकरी मिलेगी, लेकिन सच पूछिए तो यह 51 प्रतिशत एफडीआई 51 लाख बेरोजगारों को तुरंत नौकरी देगा। यही नहीं साथ में 51 लाख से ज्‍यादा लोगों के रोजगार को मजबूत बनायेगा।

वनइंडिया ने उत्‍तर प्रदेश के रायबरेली जिले में स्थित सेंटर फॉर रिटेल फुटवीयर डिजाइन एंड डेवलपमेंट स्किल्‍स मिनिस्‍ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री के पूर्व एचओडी डा. सत्‍य प्रकाश पांडेय से बात की। डा. पांडेय ने बताया कि सरकार का यह कदम देश में क्रांति लेकर आयेगा, ना केवल रोजगार के मामले में बल्कि लोगों तक क्‍वालिटी प्रोडक्‍ट पहुंचाने के मामले में भी।

डा. पांडेय के मुताबिक बिग बाजार, स्‍पेंसर्स, रिलायंस मार्ट, मोर, मेगा मार्ट, आदि के आने के बाद देश में कंज्‍यूमरिज्‍म काफी तेजी से बढ़ा है। कंज्‍यूमरिज्‍म का तात्‍पर्य है कि खरीददारी लोगों की मजबूरी नहीं आदत में शुमार हो गई है। पहले लोग समान की लिस्‍ट बनाकर बाजार जाते थे, अब सामान लाने के बाद लिस्‍ट बनती है, कि हम क्‍या-क्‍या घर लाये। खैर बात अगर इस क्षेत्र में एफडीआई की करें तो केंद्र सरकार का यह कदम देश में क्रांति ला सकता है। वो भी किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि कई क्षेत्रों में।

सबसे पहले हम उन लोगों की बात करते हैं, जो इसका विरोध कर रहे हैं। सदन के अदंर विपक्षी दलों की बात करें तो सत्‍ता पक्ष के हर कदम का विरोध करना उनकी आदत बन गया है। उन्‍हें अलग करें तो सबसे ज्‍यादा विरोध किराना स्‍टोर वाले कर रहे हैं। उनका मानना है कि गली-गली विदेशी स्‍टोर खुलने के बाद उनका व्‍यापार चौपट हो जायेगा। जबकि ऐसा ऐसा कुछ नहीं है। उनका व्‍यापार तभी चौपट होगा जब वो खराब क्‍वालिटी का सामान बेचेंगे। या फिर ठगी व मिलावट की कोशिश करेंगे। क्‍योंकि वॉलमार्ट जैसी कंपनियों के आने के बाद लोगों को क्‍वालिटी प्रॉडक्‍ट आसानी से मिलेगा और ऐसे में 'प्राइस वॉर' के साथ-साथ 'क्‍वालिटी वॉर' भी होगी।

चूंकि इंटरनेशनल रीटेलर्स 10 लाख या उससे ऊपर की आबादी वाले शहरों में ही अपने स्‍टोर खोलेंगे, लिहाजा छोटे कस्‍बों के फुटकर व थोक विक्रेताओं को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। बात आती है 10 लाख की आबादी वाले शहरों की, जिनमें मेट्रो शहरों के साथ-साथ लखनऊ, कानपुर, नागपुर, अहमदाबाद, पुणे, आगरा, इलाहाबाद, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, आदि। इन शहरों में जल्‍द ही रिटेल सेक्‍टर ऑर्गनाइज्‍ड हो जायेगा। यानी कंपटीशन तेजी से बढ़ेगा।

यही कंपटीशन देश में 51 लाख से ज्‍यादा नौकरियां लेकर आयेगा। इससे पहले चीन में ऐसा हुआ भी है। रिटेल में विदेशी निवेश के बाद चीन में करीब एक करोड़ लोगों को रोजगार मिला। भारत की बात करें तो यहां अभी तक रिटेल के नाम पर सिर्फ सामान लाकर स्‍टोर में रख देना और उन्‍हें तरह-तरह की स्‍कीम चलाकर बेच देना है। जबकि असली चीज विदेशी कं‍पनियों के आने के बाद होगी। वो है सप्‍लाई चेन और कोल्‍ड चेन मैनेजमेंट।

कैसे आयेगा इम्‍प्‍लॉयमेंट बूम

वॉलमार्ट जैसी विदेशी कंपनियों के आने के बाद सबसे बड़ा फायदा फ्यूचर ग्रुप, रिलायंस मार्ट, स्‍पेंसर्स, आदि में काम कर रहे लोगों को होगा। वे सभी विदेशी कंपनियों की ओर अच्‍छे सैलरी पैकेज की तरफ भागेंगे। एक स्‍टोर के फ्रंट एंड और बैक एंड में करीब 100 लोगों की जरूरत पड़ती है। वैसे तो 10 लाख स्‍टोर खोलने की योजना है, लेकिन शुरुआती दौर में अगर विदेशी कंपनियां देश में 50 हजार स्‍टोर खेलती है, तो इस हिसाब से सीधे 50 लाख लोगों की आवश्‍यकता होगी। यदि रिटेल स्‍टोर की संख्‍या आगे चलकर बढ़ती है तो करीब 1 करोड़ नौकरियों की संभावनाएं बनेंगी।

सरकार की नीतियों के मुताबिक विदेशी कंपनियों को 70 प्रतिशत सामान भारत से ही खरीदना होगा, जिनमें लघु उद्योग एवं गृह उद्योग भी शामिल हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर छोटी फैक्ट्रियों में क्‍वालिटी प्रोडक्‍ट नहीं हुए, तो कोई भी कंपनी उनका माल नहीं उठायेगी। इसके दो फायदे होंगे। पहला भारत के अंदर बनने वाली वस्‍तुओं की क्‍वलिटी मजबूत होगी और दूसरा इन उद्योगों में भी रोजगार बढ़ेगा। माना जा रहा है कि छोटे उद्योगों में 50 हजार तक नौकरियां बढ़ सकती हैं।

बाकी बचा 50 हजार रोजगार आयेगा सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट और कोल्‍ड चेन मैनेजमेंट से, जो इस वॉलमार्ट जैसी कंपनियों की सफलता की धुरी है। इसके चलते ट्रक वालों से लेकर किसानों व छोटे उत्‍पादकों तक सभी को फायदा पहुंचेगा। इस सेक्‍टर में हालांकि आधे लोग वही होंगे, जो स्‍टोर्स पर काम कर रहे होंगे, उनके साथ-साथ आउटसोर्सिंग की भी असीम संभावनाएं होंगी।

यही नहीं 2008 की आर्थिक मंदी यानी रिसेशन के बाद से जिन रिटेल स्‍कूलों मं सन्‍नाटा पसरा हुआ है या फिर स्‍कूल बंद हो चुके हैं, वहां छात्रों की लंबी कतारें दिखाई देंगी। यह बात तय है कि इन स्‍कूलों की फीस भी कई गुना बढ़ने की पूरी संभावना है, क्‍योंकि रिटेल मैनेजमेंट पढ़ाने वाले संस्‍थान इस मौके को गंवाने के बजाये भुनाना चाहेंगे।

अंत में देश की अर्थ व्‍यवस्‍था की बात करें तो आने वाले समय में कृषि के बाद सबसे बड़ा क्षेत्र रिटेल सेक्‍टर ही होगा। और अंत में फायदा होगा आम उपभोक्‍ता का, जिसे बाजार में बढ़ते कंप्‍टीशन के कारण अब और भी कम दामों में सामान मिलेगा।

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