भाजपा ने बनाई सोनिया को घेरने की रणनीति

उन्होंने सरकार के सहयोगी दलों को भी घेरा और पूछा कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को क्या हुआ कि सरकार छोड़ने की धमकी 24 घंटे में गायब हो गई। संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार को संकट में डालने के लिए विपक्ष के पास संख्या बल भले ही न हो, लेकिन सरकार को हर रोज कठघरे में खड़ा रखने के लिए मुद्दों की भरमार जरूर है। भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जनचेतना यात्रा के बाद सीधे संसद में सरकार पर जोरदार हमला बोलेगी। इसके ठीक पहले 20 नवंबर को यात्रा की दिल्ली में समापन रैली में वह अपना शक्ति प्रदर्शन भी करेगी। 22 नवंबर से शुरू हो रहे सत्र के लिए पार्टी की रणनीति 21 नवंबर को संसदीय दल की कार्यकारिणी की बैठक में बनेगी। इस बार भाजपा की रणनीति बदली हुई है।
वह सरकार से ज्यादा आक्रमण संप्रग की मुखिया सोनिया गांधी व उसके सहयोगी दलों पर करेगी। सरकार के हर निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री के साथ सोनिया गांधी को भी जिम्मेदार ठहराएगी। साथ ही इन फैसलों पर साथ देने के लिए सहयोगी दलों की खबर लेगी। भाजपा अब अपने सवालों को सरकार व प्रधानमंत्री के बजाए सोनिया गांधी की तरफ मोड़ रही है। दरअसल भाजपा की रणनीति महंगाई व भ्रष्टाचार के लिए सरकार के साथ कांग्रेस अध्यक्ष व संप्रग के घटक दलों को लपेटने की है।












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