तृणमूल सांसद आ रहे हैं दिल्ली, पेट्रो मूल्य कम करने को बनाएंगे दबाव

Prime Minister Manmohan Singh
दिल्ली (ब्यूरो)। पेट्रो मूल्य वृद्धि पर अब सरकार के अंदरखाने रार मचना तय है। मूल्यों के विरोध में बगावत पर उतरी संप्रग की सबसे बड़ी सहयोगी ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सांसद मंगलवार को दिल्ली आ रहे हैं और इस दौरान वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेंगे। संभावना जतायी जा रही है कि वे सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाएंगे कि सरकार पेट्रो मूल्य को वापस ले। हालांकि मनमोहन सिंह ने पेट्रो मूल्य को वापस लेने से इंकार कर दिया है। ऐसे में सरकार और तृणमूल कांग्रेस के बीच तलवार खींच सकती है।

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव मुकुल राय ने बताया कि सोमवार को मुसलमान भाईयों का त्योहार है, इसलिए मंगलवार को पार्टी के सांसद दिल्ली रवाना होंगे। उसी दिन या फिर उसके अगले दिन प्रधानमंत्री से समय लेकर उनसे मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि पेट्रोल की मूल्य वृद्धि वापस लेने के मुद्दे पर अब भी तृणमूल सांसद अडिग हैं। प्रधानमंत्री से मिलने के बाद जो भी आश्वासन मिलेगा उससे पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद पार्टी द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

उधर, कांग्रेस औऱ तृणमूल के बीच बढ़ती खाई पर भाजपा ने भी नजरें गड़ा दी हैं। उसकी कोशिश है कि संप्रग में फूट का वह लाभ ले सके। इसके लिए उसने गैर संप्रग दलों के साथ अनौपचारिक चर्चाएं शुरू कर ही दी हैं साथ ही संप्रग के दलों के साथ भी संपर्क-सूत्र कायम किए जा रहे हैं। हाल में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राकांपा और द्रमुक की नाराजगी को देखते हुए पार्टी अपनी संभावनाएं तलाशने में जुट गई है। दरअसल, पेट्रोल कीमतों में वृद्धि का मुद्दा इस समय सबसे गरम है और अगर बढ़ी हुई कीमतें कम नहीं हुई तो भाजपा इसे आधार बनाकर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार के लिए बड़ा संकट भी खड़ा कर सकती है।

संसद के बीते शीतकालीन सत्र की कड़वी यादें अभी भी जेहन में है। 2जी घोटाले की जांच के लिए जेपीसी की मांग करते हुए भाजपा व अन्य विपक्षी दलों ने लगभग पूरे सत्र को नहीं चलने दिया था। इस बार महंगाई व पेट्रोल की कीमतों में हाल में की गई बढ़ोतरी को लेकर भाजपा वैसा ही माहौल बनाने की तैयारी में है। अन्ना हजारे के जन लोकपाल का मुद्दा तो इस सत्र में सरकार के लिए परेशानी का सबब है ही, ऐसे में अगर महंगाई को लेकर अगर विपक्ष व सरकार के सहयोगी दलों के मौजूदा तेवर बरकरार रहे तो सरकार के लिए लोकसभा में संख्याबल बरकरार रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। भाजपा नेतृत्व ने इस सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के संकेत दिए है। इसके पीछे पार्टी की सोची समझी रणनीति है। इसमें कांग्रेस के सहयोगी दलों की महंगाई के खिलाफ बयानबाजी को दिखावटी साबित करना व उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों को अपने पक्ष में करना है।

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