दिल्ली में हुआ बड़ी लूट का खुलासा

पुलिस ने उनकी निशानदेही पर 40 लाख रुपये की कीमत की विदेशी करेंसी बरामद कर ली है। साजिशकर्ता कंपनी के मालिक का दोस्त है और उसने ही पूरे घटना को अंजाम दिया। जिला के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वी रंगनाथन ने बताया कि 31 अक्तूबर की रात सूचना मिली कि बाइक सवार बदमाशों ने एक कंपनी के कर्मचारियों से 40 लाख रुपये झपट लिए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस को गौरव और रोहित ने सारी बातें बताई।
उन्होंने बताया कि दोनों वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर ऑथराइज बिजनेस हाउस में कार्यरत हैं जो ए ब्लॉक तिलक नगर में स्थित है। दोनों यहां बतौर कलेक्शन एजेंट काम करते हैं। घटना के समय दोनों कलेक्शन की रकम को मालिक अशोक मानू के घर ले जा रहे थे जिसे बाइकर्स बदमाशों ने झपट लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया, लेकिन पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। पुलिस ने दोबारा पीड़ितों के साथ घटनास्थल का मुआयना किया। इस दौरान भी पुलिस को उनकी बातें संदिग्ध लगी।
2 नवंबर को तिलक नगर थाने में एक ऐसे सीक्रेट रूम का उद्घाटन हुआ , जिसमें सीक्रेट माइक्रोफोन और कैमरा लगा है। फिल्मों की तरह इसमें छत से लटकने वाले बल्ब लगे हुए हैं , जिनकी लाइट के नीचे कुर्सी पर बैठे आदमी के चेहरे पर पड़ती है। कमरे में और कुछ भी नहीं है। इसे लाई - डिटेक्टर रूम का नाम दिया गया है , हालांकि इसमें ऐसी कोई मशीन नहीं है। रोहित और गौरव को इस कमरे में बिठाकर पुलिस वाले बाहर चले गए।
दोनों आपस में बातें करने लगे कि आज थाने से बाहर जाकर तीनों रकम का बंटवारा कर लेंगे। उधर , मॉनिटरिंग रूम में उन्हें देख और सुन रहे एसआई बसंत कुमार , हवलदार सुरेंद्र और कॉन्स्टेबल हरीश ने उनकी बातचीत रिकॉर्ड कर ली। पुलिस समझ चुकी थी कि लूट फर्जी थी और कोई तीसरा मुलजिम भी है। अब रोहित और गौरव को बाहर निकाल कर पूछताछ हुई , तो राज खुल गया। कड़ाई से पूछताछ में दोनों ने बताया कि घटना की साजिश अशोक के दोस्त गुरदीप सिंह ने बनाई थी। दोनों ने कलेक्शन करने के बाद रुपये गुरदीप के हवाले कर दिए थे। बाद में रुपये तीन हिस्सों में बंटने थे। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर प्रापर्टी डीलिंग करने वाले गुरदीप को विष्णु गार्डन से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 40 लाख कीमत की विदेशी करेंसी मिल गई।












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