बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ में अतिक्रमण

Gautam Buddha's holy place Sarnath
लखनऊ। भगवान बुद्घ की तपोस्थली सारनाथ जहां पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। जहां भगवान बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को धर्मचक्र प्रवर्तन का उपदेश दिया था। वह इन दिनों अतिक्रमण की चपेट में है। पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण और हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिये विश्व के कई देश चिंतन कर रहे हैं और इस पर करोड़ों रुपये खर्च भी हो रहे हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन इसके प्रति पूरी तरह से उदासीन है।

भारत सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए नया कानून बनाया है एवं कड़ी सजा का प्रावधान किया है लेकिन उन्हें लागू करने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है। करीब 2600 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध ने यहीं से अपने पांच शिष्यों को शान्ति का प्रथम उपदेश दिया था। यहां से सारी दुनिया में बौद्ध धर्म का फैलाव हुआ था। धर्म का आध्यात्म और दर्शन के लिहाज से यह महत्वपूर्ण स्थान आज नौकरशाही के चक्रव्यूह में फंसा है एवं अपनी पहचान खो रहा है। यहां के ऐतिहासिक स्तूप, स्त भों और अन्य स्मारकों में लापरवाही की दरारें पड़ चुकी हैं। सारनाथ में भगवान बुद्ध से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने के लिए दुनिया भर के लोग यहां पहुंचते हैं। हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचे लोग भग्नावशेषों के दर्शन कर अपने को धन्य समझते हैं, आज यही अवशेष जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं।

पुरातत्व के नये कानून के तहत सौ से तीन सौ मीटर तक के क्षेत्र को सुरक्षित कर रखा है लेकिन विकास प्राधिकरण एवं पुरातत्व विभाग की उदासीनता से सारनाथ के निषिद्ध क्षेत्र में अवैध निर्माण जारी है। डग्गामार वाहनों एवं धुआं उगलते तीन पहिया वाहनों के चलते पूरा क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में है। पुरातत्व की खुदाई में निकला बुद्ध कालीन खण्डहर, संग्रहालय, प्राचीन मूलगंध कुटी विहार, चीन वर्मा, थाईलैण्ड व जापान सहित अनेक देशों के भगवान बुद्ध से जुड़े पुरावशेष 17 एकड़ में फैले हैं। इसके अलावा यहां स्थित संग्रहालय में खुदाई में मिले अवशेषों को सुरक्षित रखा गया है, इनका अवलोकन करने दुनिया भर से लोग पहुंचते हैं। खुदाई में निकला राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्त भ हर व्यक्ति में गौरव का अहसास कराता है।

इतने धार्मिक व पवित्र स्थल की मौजूदा स्थिति यह है कि यहां आने वालों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। ठहरने के लिए अच्छे होटल नहीं हैं। सड़कों का बुरा हाल है। भारतीयों के लिए जहां पुरातात्विक थाती है वहीं दुनियाभर में रहने वाले बौद्ध धर्मावल िबयों की आस्था से भी जुड़े हैं। अगर ये नष्ट हो गये तो सारनाथ का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा।

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