माया को भ्रष्‍ट कहने वाले डीआईजी मेंटल हॉस्पिटल पहुंचे

Mayawati
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश के डीआईजी फायर डीडी मिश्र ने मुख्‍यमंत्री मायावती को भ्रष्‍ट कह दिया तो उन्‍हें मेंटल हॉस्पिटल भेज दिया गया गया। जिसके बाद विपक्षी दलों ने मायावती पर तीखे वार शुरू कर दिये। मुलायम सिंह यादव ने कहा कि डीडी मिश्र को साजिश के तहत मा‍नसिक रोग अस्‍पताल भेजा गया है।

मायावती को भ्रष्‍ट बताते हुए डीडी मिश्र ने कहा कि वो उनकी कभी भी हत्‍या करवा सकती हैं। शुक्रवार की शाम यह कहकर मिश्र ऑफिस में ही जम गये। उन्‍होंने कहा कि अगर वो घर गये, तो रास्‍ते में ही उनकी हत्‍या कर दी जायेगी। देखते ही देखते पूरा मीडिया इकठ्ठा हो गया। उन्‍होंने मीडिया के सामने मायावती की पोल खोलनी शुरू कर दी। फिर क्‍या था आला अधिकारी पहुंचे और जबरन डीडी मिश्र को घर ले जाने के बजाये अस्‍पताल पहुंचा दिया। वो भी मानसिक रोग चिकित्‍सालय।

खास बात यह है कि गृहसचिव कुंवर फतेह बहादुर ने खुद कहा कि डीडी मिश्रा की मानसिक हालत ठीक नहीं है। उन्‍होंने कहा कि मिश्र ने जो भी आरोप लगाये, उससे उनकी मानसिक स्थिति ठीक न होने की आशंका के तहत कल रात ही उन्हें उनके परिजनों की उपस्थिति एवं राय से छत्रापति शाहूजी चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग में ले जाकर जांच करायी गयी जहां उनका इलाज चल रहा है। फतेह बहादुर ने बताया, डाक्टरों ने जांच के बाद मिश्र को मानसिक असंतुलन का शिकार और बीमार बताया है जिसके लिए उनका इलाज चल रहा है।

डीआईजी मिश्र को मानसिक रोगी बताने की साजिश: मुलायम

डीडी मिश्र के अस्‍पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा कि सरकार के खिलाफ बोलने पर डीआईजी को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताने की साजिश की जा रही है। मुलायम ने कहा कि प्रदेश में यह माहौल बन गया है कि जो अफसर सरकार के भ्रष्टाचार में शामिल नहीं है, उसे अपमानित और प्रताडि़त किया जाता है। डीआईजी फायर डी.डी.मिश्र का मामला नया नहीं है, इससे पहले भी सरकार ईमानदार अधिकारियों को परेशान करती रही है। उन्होंने कहा कि हरमिंदर राज सिंह की इसी तनाव में जान ले ली गयी। पीसीएफ के एक प्रबंधक ने फांसी लगा ली।

मुलायम ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और परिवार कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार और बजट के लूट के चलते ही दो सीएमओ मारे गए। पोल खोल देने पर उतारु डिप्टी सीएमओ डा. सचान की जेल के अन्दर हत्या कर साक्ष्य मिटा दिए गए। कारागार विभाग मुख्‍यमंत्री के पास है उन पर हत्या की नैतिक जिम्‍मेदारी बनती है किन्तु दो मंत्रियों बाबू सिंह कुशवाहा और अनंत मिश्र से इस्तीफा लेकर मामले की फाइल दबा दी गई। अब सीबीआई जांच में मुश्किले आ रही है।

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