कनिमोझी की जमानत याचिका खारिज, जेल में ही रहेंगी

सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने नरम रुख अपनाते हुए कनिमोझी समेत शरद कुमार, आसिफ बलवा, करीम मोरानी और राजीव अग्रवाल की जमानत का विरोध नहीं किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से पूछा था कि कुछ लोगों की जमानत याचिका का विरोध किया जा रहा है, जबकि कुछ लोगों के मामले में नरमी क्यों बरती जा रही है। दिल्ली की पटियाला हाउस की विशेष अदालत से जमानत अर्जी रद्द होने के बाद अब आरोपियों के पास हाई कोर्ट जाने का रास्ता है।
24 अक्टूबर को पटियाला हाउस अदालत ने कनिमोझी समेत आठों आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन आरोपियों में कनिमोझी के अलावा कलैगनर टीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर और कनिमोझी के हिस्सेदार शरद कुमार, डीबी रियल्टी ग्रुप के शाहिद बलवा, कुसेगांव फ्रूट ऐंड वेजिटेबल के हिस्सेदार आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, पूर्व संचार मंत्री ए. राजा के निजी सचिव रहे आर. के. चंदोलिया, पूर्व टेलिकॉम सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और सिनेयुग के मालिक करीम मोरानी शामिल हैं।
कनिमोझी की जमानत अर्जी धारा 437 के तहत दाखिल की गई थी। कनिमोझी के वकील ने स्पेशल प्रोविजन जो कि महिला, बुजुर्ग और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए होती है के तहत याचिका दाखिल की थी। सियासी गलियारे में कयास लगाया जा रहा था कि आज कनिमोझी को जमानत मिल जाएगी पर ऐसा नहीं हो सका। अब संभावना जतायी जा रही है कि जल्द ही सीबीआई कोई नया हथकंड़ा अपनाकर उन्हें जमानत के लिए रास्ता प्रशस्त करेगी क्योंकि केंद्र सरकार में द्रमुक एक प्रमुख सहयोगी है।












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