चीन बॉर्डर पर एक लाख और जवानों को तैनात करेगा भारत
टीएनएन के हवाले से खबर आई है कि रक्षा मंत्रालय इस बाबत 64 हजार करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी भी दे दी है। इस पैसे से चीन से लगी सीमा पर तैनात करने के लिए भारतीय सेना की चार नई डिविजन बनाई जाएगी। इनमें से दो माउंटेन स्ट्राइक कोर का हिस्सा होंगी, जो विशेष आक्रामक सैन्य अभियान में माहिर होगी। सरकार की योजना लद्दाख और उत्तराखंड में भी एक-एक ब्रिगेड तैनात करने की भी है।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की यह अब तक की सबसे बड़ी योजना है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह चीन से लगती सीमा पर सबसे बड़ी तैनाती भी साबित होगी। दो सप्ताह पहले ही रक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के पास इसे मंजूरी के लिए भेजा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट की समिति के सामने पेश किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि आर्मी 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) के दौरान 90 हजार जवानों की भर्ती करेगी। इन सभी को भारत-चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा। 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान सेना में दो नई डिवीजन के साथ 36 हजार जवान बढ़े हैं। प्रस्तावित आधुनिकीकरण योजना में पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मानवरहित विमान और हल्के हेलिकॉप्टर को भी बढ़ाने का मंसूबा है। रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि योजना मुख्य रूप से भारत-चीन सीमा से जुड़ी है, लेकिन अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी सैन्य क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव है। वर्तमान में यहां पर सिर्फ सेना की एक ब्रिगेड तैनात है, जिसे बढ़ाकर एक डिविजन तक करने की योजना है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार में एयरफोर्स और नेवी क्षमता बढ़ाने का भी प्लान है।













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