डकैत बोला, खुद को बचाने के लिए की हत्या

न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने फैसले में कहा सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी असलम साथियों मो. सलीम और मो. हनीफ के साथ जंगपुरा एक्सटेंशन स्थित मृतक राम प्रकाश नागर के घर में घुसा था। अदालत ने कहा इसमें कोई संदेह नहीं कि वे लूटपाट के लिए गए थे, मगर उनके साथ घातक हथियार था। अत: यह नहीं माना जा सकता कि वे मात्र लूटपाट करना चाहते थे। अदालत ने कहा कि हथियार का अर्थ है कि जरूरत पड़ने पर वे हत्या भी कर सकते थे और इस मामले में ऐसा ही हुआ।
खंडपीठ ने मामले में घायल मृतक का भाई राममूर्ति, उनकी पुत्री अनुराधा व एक अन्य परिवार का सदस्य चश्मदीद गवाह है और उन्होंने आरोपी की शिनाख्त की है। इसके अलावा उसे भीड़ ने पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। अत: सभी तथ्यों को देखने के बाद वे महसूस करते है कि अभियुक्त किसी भी प्रकार से राहत पाने का हकदार नहीं है। अत: वे उसकी अपील खारिज करते हैं। 10 मई 1992 को हुई घटना के अनुसार तीनों अभियुक्त दोपहर मकान में घुसे।
रामप्रकाश और उनकी पत्नी से मारपीट कर नगदी और जेवरात मांगे। शोर सुनकर उनका भाई और अन्य लोग वहां पहुंचे तो स्वयं को घिरा देख उसने दोनों भाइयों को गोली मार दी थी। बाद में राम प्रकाश की मौत हो गई थी। निचली अदालत ने असलम को आजीवन कारावास की सजा सुना दी जबकि दो अन्य को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया था।












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