केंद्र ने किया राजीव गांधी के हत्यारों की सजा कम करने का विरोध

rajiv gandhi
चेन्नई। राजीव गांधी हत्या कांड में मौत की सजा का सामना कर रहे तीन दोषियों की ओर से दायर याचिका का केंद्र ने पुरजोर विरोध करते हुए आज कहा कि दया याचिका को निपटाने में हो रही देर फांसी की सजा को कम करने के लिए वैध आधार नहीं है। केंद्र ने मुरूगन, संतन और पेरारीवलन की याचिकाओं पर दाखिल किए गए अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि इसमें जितनी भी देर हो, यह न तो सजा कम करने की परिस्थिति नहीं है और न ही यह मौत की सजा कम करने के लिए कोई वैध आधार है।

तथा किसी भी स्थिति में अपराध की गंभीरता कम नहीं हो सकती है। गौरतलब है कि 30 अगस्त को न्यायमूर्ति सी नागप्पन और न्यायमूर्ति एम सत्यनारायण की खंड पीठ ने इन तीनों दोषियों की मौत की सजा को लागू करने पर आठ हफ्ते की रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने आज इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 29 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी क्योंकि उच्चतम न्यायालय इस मामले से जुड़ी याचिकाओं को अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

हलफनामे में कहा गया है कि इस शक्ति में किसी भी वैधानिक प्रावधान या प्राधिकार द्वारा किसी भी तरीके से बदलाव, सुधार या छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय गृहमंत्रालय में पदस्थ संयुक्त सचिव (न्यायिक) ने केंद्र की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे में इस बात का जिक्र किया कि संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति की शक्ति एक विवेकाधीन शक्ति है, जिसे वैधानिक प्रावधान से नहीं हटाया जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 71 के तहत शक्ति के इस्तेमाल को किसी समय सीमा के दायरे में नहीं लाया जा सकता। हलफनामे में कहा गया है कि सख्त सजा ही अन्य संभावित अपराधियों को इस तरह के अपराध करने से रोक सकती है। केंद्र ने कहा कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा की पुष्टि उच्चतम न्यायालय ने कर दी है। उसने इस सिलसिले में दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है।

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