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मायावती के सांसद ने खरीदी संरक्षित इमारत!

Uttar Pradesh Chief Minister Mayawati
लखनऊ। रंगनाथ मिश्र के बाद अब बसपा सांसद गंगा चरण राजपूत लोकायुक्त की जांच में फंस चुके हैं। राजपूत पर आरोप है कि उन्होंने संरक्षित भूमि खरीदी तथा खरीददारी में स्टाम्प चोरी किए। फिलहाल उन पर लगे आरोपों की जांच महोबा जिला प्रशासन कर रहा है। यह पहला अवसर नहीं होगा जब बसपा के किसी मंत्री व सांसद पर पर पद के दुरपयोग व भ्रष्टाचार का आरोप लगा हो। माया के चहेतों में अब आधा दर्जन मंत्री इस प्रकार की जांचों में फंस चुके हैं।

राजपूत पर संरक्षित और करोड़ों रूपये की भू-सम्पत्ति क्रय करने में स्टाम्प की चोरी करने का आरोप है। मामले का जब खुलासा हुआ तो जिला प्रशासन ने इसकी जांच शुरू कर दी है। राज्य में बदले समीकरणों ने बसपा की परेशानी बढ़ा दी है। कुछ दिन पूर्व की बात है जबकि बसपा के एक मंत्री पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगा। मुख्यमंत्री मायावती ने तो उपरोक्त मंत्री को क्लीन चिट दे दी थी लेकिन विरोधियों ने मुद्दे को जमकर उछाला।

यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसे ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद को लेकर बसपा की मुश्किलें अभी कम नहीं हुयी थी कि राजपूत पर संरक्षित जमीन खरीदने का अरोप लग गया। महोबा जिले की तत्कालीन चरखारी रियासत के ओल्ड पैलेस व ड्योढी दरवाजे को खरीदने के मामले में जिला प्रशासन तक शिकायतों की फाइलें मोटी हो गयी हैं। ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व की यह संरक्षित भू सम्पत्ति उन्होंनें अपने पुत्र अखिल राजपूत के नाम एक करोड़ बीस लाख रुपये में खरीदी।

यह पर भी सांसद ने अपने पद का रौब दिखाते हुए स्टाम्प की चोरी की और सम्पत्ति का महज किरायानामा लिखवा कर कब्जा कर लिया। इस सौदेबाजी की खबर जब गांव वालों को चली तो चरखारी कस्बे के निवासी आक्रोशित हो उठे। सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी ने मामले को तूल देते हुए कहा कि वह इस गोरखधंधे की शिकायत लोकायुक्त की तैयारी में है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रथम तो पुरातत्व विभाग से संरक्षित होने के चलते इमारत की बिक्री अथवा उसे किराये पर उठाया जाना गैर कानूनी है। इसके अतिरिक्त राजपूत पर टैक्स चोरी का दूसरा आरोप भी है। सपा का कहना है कि उक्त इमारत को अपनी सम्पत्ति बताकर बेंचने वाले चरखारी के जयन्त सिंह के खिलाफ भी जांच व कार्यवाही की जानी चाहिए। जबकि जयन्त सिंह उपरोक्त सम्पत्ति को निजी संपत्ति करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास सम्पत्ति के क्रय विक्रय के पूर्ण अधिकार हैं। उधर राजपूत ने इस प्रकार की किसी भी खरीददारी से ही इनकार कर दिया। राजमहल को उनके पुत्र अखिल ने राजा जयन्त सिंह से तीस वर्षों के लिये किराये पर लिया है।

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