दूनिया में फैली आर्थिक मंदी का असर भारत पर भी: प्रणव मुखर्जी

उन्होंने आर्थिक संपादकों के सालाना सम्मेलन में यहां कहा भारत आठ फीसद वृद्धि दर्ज करेगा यह खबर प्रसन्नता का विषय होगी। मुखर्जी ने वैश्विक आर्थिक समस्याओं के लिए आर्थिक मंदी और बढ़ती मुद्रास्फीति दोनों को जिम्मेदार ठहराया विशेष तौर पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत को जो 105 डालर प्रति बैरल के उंचे स्तर पर है। उन्होंने दहाई अंक के करीब बढ़ती मुद्रास्फीति के लिए मुख्य तौर पर वैश्विक जिंसों की बढ़ती कीमत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा मुद्रास्फीति नौ फीसद के आसपास अटकी हुई है।
इसके बावजूद मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित सकल मुद्रास्फीति दिसंबर से घटेगी और मैं आशन्वित हूं कि वित्त वर्ष सात फीसद के साथ समाप्त होगा। रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद सकल मुद्रास्फीति दहाई अंक के आस पास टिकी हुई है। अगस्त महीने में यह 9.78 फीसद पर थी। उन्होंने कहा कि आरबीआई की सख्त मौद्रिक नीति ने चालू वित्त वर्ष के दौरान वृद्धि को भी प्रभावित किया है। मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के लिए आरबीआई ने मार्च 2010 से नीतिगत दरें 12 बार बढाई।












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