31 अक्टूबर तक निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी हो: हाई कोर्ट

न्यायालय ने जनगणना विभाग को भी निर्देश दिए कि वार्ड के अनुसार जनगणना की सूची राज्य निर्वाचन आयोग को उपलब्ध करायी जाये ताकि आयोग वार्डों के परिसीमन और आरक्षण आदि के बारे में निर्णय ले सके। न्यायमूर्ति अमिताभ लाला और न्यायमूर्ति वी.के. माथुर की खण्डपीठ ने उपरोक्त आदेश उन तीन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिए जिसमें शहरी निकायों का कार्यकाल नवम्बर के मध्य में समाप्त होने की बात कही गयी थी तथा यह मांग की गयी कि इससे पहले निकाय चुनाव हो जाने चाहिए।
न्यायालय के इस आदेश के अनुसार यदि जनगणना विभाग 31 अक्टूबर के पहले निर्वाचन आयोग को सभी वार्डों आदि को विवरण उपलब्ध हो जाए तभी चुनाव संभव है अन्यथा निकाय कार्यकाल समाप्त होने के बाद ही चुनाव संभव हो सकेंगे। याचिकाओं पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने 14 अक्टूबर को अपना आदेश सुरक्षित कर लिया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि निकायों के कार्यकाल समाप्त होने के पहले चुनाव कराना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है जबकि सरकारी पक्ष ने दलील दी थी ग्रामीण अंचलों से शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2001 से करीब 125 प्रतिशत लोगों का पलायन हुआ है। ऐसे में शहरी निकायों के चुनाव निष्पक्ष होने में संदेह पैदा करते हैं। सरकारी पक्ष का कहना था कि वर्ष 2011 की जनगणना प्रकाशित तो हुई है लेकिन इसमें वार्ड अनुसार विवरण नहीं दिया गया है। वार्ड अनुसार विवरण उपलब्ध कराने पर राज्य सरकार चुनाव की तैयारियां शुरु कर देगी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि हो सकता है कि सरकार हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करे।












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