बहू की हत्या में उम्रकैद काटेगी 95 साल की सास

हाईकोर्ट ने अपराध को संगीन माना
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति सुनील गौड़ की खंडपीठ ने 95 साल की महिला सुमित्रा को अपने बड़े बेटे और पुत्रवधू के साथ मिलकर इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने का दोषी ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा, निचली अदालत ने फैसला सुनाते वक्त कानूनी तौर तरीकों सहित कई अहम चीजों को नजरअंदाज किया था। निचली अदालत ने महिला के मृत्यु पूर्व बयान को संदेहास्पद मानते हुए उसे अर्द्ध बेहोशी की हालत में दिया गया बयान करार दिया था। उसी आधार पर निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि पीडि़त महिला ने एसडीएम के समक्ष जो बयान दिया वह कानूनी तौर पर सबसे बड़ा साक्ष्य है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने पीडि़ता छोटी बहू मीनू द्वारा मृत्यु से पूर्व दिए गए बयान को ही पूर्ण साक्ष्य मानते सास सुमित्रा को हत्या का दोषी ठहराया।
मृत्यु से पूर्व मीनू ने एसडीएम के समक्ष दिया था बयान
मृत्यु से पूर्व मीनू ने एसडीएम के समक्ष बयान दिया था कि उसकी अमरपुरी निवासी सुमित्रा के छोटे बेटे संजय से 1994 में शादी हुई थी। सास, जेठ और जेठानी उसे दहेज के लिए परेशान करते थे। 20 मार्च 1996 को सास ने बड़े बेटे और बड़ी पुत्रवधू के साथ मिलकर उसपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी। गोद में उसका सात माह का बेटा भी था। वह भी झुलस गया।












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