दीवाली पर जांच परख कर खरीदें चांदी के सिक्के

Diwali Coins
दीपावली आते ही बाजार में सोने व चांदी के सिक्कों की बिक्री तेज हो गयी है। उत्तर प्रदेश में चांदी का बाजार प्रमुख है दीपावली के अवसर लोग जमकर चांदी के सिक्कों की खरीददारी करते हैं। सिक्कों में होने वाले मुनाफे के चलते सिक्कों में धोखाधड़ी जोरों पर है। पुराने सिक्के के नाम पर बाजार में नये सिक्के बेजे जा रहे हैं।

देखने में एकदम पुराने व 1600 व 1800 सन के इन सिक्कों को हाल ही बनाया गया है तथा इन्हें रसायन लगाकर पुराना किया जा रहा है। आमतौर पर लोग भी व्यापारियों के इस धोखे को समझ नहीं पा रहे है।

दीपावली पर चांदी का सिक्का रखीदें लेकिन सावधान रहे। राजधानी लखनऊ ही नहीं आस-पास के तमाम जिलों में पुराने सिक्कों के नाम पर ग्राहकों से ठगा जा रहा है। प्रकाश पर्व पर सिक्का खरीदने वालो पहली चाहत पुराने चांदी के सिक्के होते हैं क्योंकि पुराने सिक्कों में चांदी का प्रतिशत अधिक होता है। यह बात व्यापारी भी भली भांति जानते हैं।

ग्राहक दुकान पर पहुंचते ही पुराने सिक्के की मांग करता है जिस पर विलियम, विक्टोरिया या फिर किसी अन्य राजा या अंग्रेज गर्वनर की फोटो बनी हो। ग्राहकों की इसी मंशा का लाभ व्यापारी उठा रहे हैं। ज्ञात हो कि बीते कुछ वर्षों में जिस पर सोने व चांदी को लोगों ने निवेश का एक माध्यम बना लिया है उससे हजारों की संख्या में सिक्के लोगों के घरों व बैंक के लॉकर में कैद हो गए है।

अब ऐसे में बाजार में पुराने सिक्के रहे ही नहीं जबकि ग्राहक पुराने सिक्के ही मांग रहा है। अकेले राजधानी लखनऊ के सर्राफ बाजार में दीपावली के एक माह के भीतर करीब पचास हजार सिक्के बिक जाते हैं। जब बाजार में सिक्कों की कमीं हो गयी तो व्यापारियों ने इसका भी एक मार्ग खोज निकाला ताकि मुनाफा कम न होने पाए।

व्यापारियों ने दीपावली पर गणेश लक्ष्मी की फोटो बने सिक्के ढलवाए लेकिन लोगों ने उसमें रूचि नहीं ली। ग्राहकों की पहली पसंद पुराने सिक्के ही रहे जिसे देखते हुए व्यापारियों ने नकली पुराने सिक्के ढलवाने शुरू कर दिए। आज बाजार में जो पुराने सिक्के मिल रहे हैं वह वास्तव में पुराने नहीं बल्कि नये ही है।

इन सिक्कों को रसायन लगाकर 15 दिनों के लिए मिट्टी में दबा दिया जाता है। पन्द्रह दिनों पश्चात् जब सिक्के मिट्टी से बाहर निकाले जाते हैं वह हूबहू पुराने जैसे दिखायी देते हैं। इन सिक्कों पर विक्टोरिया की फोटा व वर्ष 1800 छपा होता है जबकि यह उस वक्त के होते नहीं।

व्यापारी बताते हैं कि ऐसे सिक्कों में 40 से 60 प्रतिशत तक चांदी होती है, लेकिन पुराने सिक्कों के नाम पर इन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। ज्ञात हो कि नया सिक्का लखनऊ के बाजार में 600 रुपये का है लेकिन जब उसे पुराना कर दिया जाता है तो उसकी कीमत 1200 रुपये तक हो जाती है। इसी धोखेबाजी से व्यापारी दोगुना तक मुनाफा कमा रहे हैं।

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