दलित वोट बैंक खिसकने से घबरा रहीं मायावती

दलित बसपा का नहीं कांग्रेस का पारम्परिक वोट बैंक है बीच के कुछ वर्षों में बहुजन समाजपार्टी के कुछ कार्यों के चलते कुछ प्रतिशत दलित बसपा के साथ हो गया जिससे बसपाइया यह कहने लगे कि सारा दलित बसपा के साथ है। ऐसा नहीं है दलित आज भी कांग्रेस के साथ है। उनका कहना है कि राहुल गांधी के दौरों व आश्वासनों के बाद से दलितों में एक नया उत्साह व जोश पैदा हो गया है। वर्मा ने कहा कि राहुल दलितों के सच्चे हितैषी है तथा दलितों का भी विश्वास राहुल में हैं ऐसे में बसपा यह विचार छोड़ दे कि दलित उसके साथ है।
उन्होंने कहा कि बीते कुछ समय में राज्य में बदले राजनीतिक समीकरणों से यह पता चलता है कि कर्ई पार्टियां दलितों को वोट बैंक समझकर राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कई दल दलितों के अपने साथ होने के नाम पर राजनीतिक सौदेबाजी कर रहे हैं। श्री वर्मा ने दावा किया कि दलित कांग्रेस के साथ है तथा उसने यह समझ लिया है कि कांग्रेस के साथ रहकर ही उसके विकास की राह प्रशस्त हो सकती है।
इसका मुख्य कारण है कि मनमोहन सिंह नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने दलितों के विकास के लिए कई कार्य किए हैं। यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गयी मनरेगा योजना का यदि सबसे अधिक लाभ किसी को मिला है वह है दलित। गांवों में रहने वाले दलितों के नाम जमीन नहीं है वह मजदूरी कर अपना जीवकोपार्जन करते हैं ऐसे में योजना उनके हितों को देखकर ही शुरू की गयी थी।












Click it and Unblock the Notifications