बसपा सरकार में मुस्लिमों की सर्वाधिक उपेक्षा: अखिलेश यादव

क्रांतिरथ लेकर बदांयू पहुंचे अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य में गत साढ़े चार वर्षों से बसपा की सरकार है लेकिन इस पूरे समय में मुस्लिमों के हित में कोई भी निर्णय नहीं लिया गया। जब चुनाव का समय आया तो मायावती ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर मुस्लिमों के लिए आरक्षण की मांग कर दी।
अखिलेश यादव का कहना है कि मायावती का खत सिर्फ चुनावी स्टंट है इससे यह नहीं कहा जा सकता है कि माया सरकार मुस्लिमों की हिमायती है क्योंकि मायावती के कार्यकाल में मुस्लिमों की सभी ओर से उपेक्षा की गयी है। उन्होंने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट बताती है कि मुसलमान बहुत पिछड़े तथा गरीबी व बेरोजगारी के शिकार हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी मुलसमानो के साथ दगा की और सच्चर कमेटी की सिफारिशें नहीं लागू की। श्री यादव ने कहा कि सपा की सरकार बनने पर रिपोर्ट में जो भी सिफारिशे की गयी हैं उन्हें लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सपा ही संसद और विधानसभा के अन्दर तथा बाहर मुस्लिम के हक के लिए हमेशा संघर्ष करती रही है।
मुस्लिमों के हक की बातें करने के बाद अखिलेश यादव को हिन्दुओं की भी हल्की सी याद आ गयी और उन्होंने कहा कि सपा ने ही हिन्दू-मुस्लिम के बीच की खाईं को पाटने का काम किया है। सपा की सरकार के दौरान मुस्लिमों और उर्दू भाषा को पूरा महत्व दिया गया।
उन्होंने बताया कि सपा के कार्यकाल में पुलिस तथा पीएसी में 14 प्रतिशत मुसलमानों की भर्ती की गयी। राज्य सरकार व केन्द्र सरकार के बीच के रिश्तों को उजागर करते हुए श्री यादव ने कहा कि दोनों सरकारें मिली हुई हैं, मुख्यमंत्री मायावती कांग्रेस को समर्थन दे रही हैं और बदले में कांग्रेस राज्य में बसपा सरकार के काले कारनामों की अनदेखी कर रही है।












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