सहयोगियों का बड़बोलापन तो नहीं अन्ना के मौन का कारण!

आपको बताते चलें कि बीते एक सप्ताह से अपने सहयोगियों पर हो रहे हमलों के बीच अन्ना हजारे ने शनिवार को अचानक मौनव्रत की घोषणा कर दी। अन्ना के अचानक इस फैसले ने सबको सकते में डाल दिया। खैर यह पहली बार नहीं है जब अन्ना हजारे ने मौन व्रत रखा हो मगर कई चुनावी राज्यों के दौरों की घोषणा के बाद अचानक मौन व्रत का निर्णय चौकाने वाला है। अन्ना के अनुसार वह आज से अनिश्चितकालीन मौनव्रत शुरू करेंगे। इस दौरान वह रालेगण सिद्धि के पद्मावती देवी मंदिर परिसर स्थित एक विशाल वटवृक्ष की लटकती जटाओं की बीच बनी विशेष कुटिया में बैठेंगे।
मौनव्रत के दौरान वह अपने गांव से बाहर नहीं जाएंगे। यानी, पूर्व घोषित उनके सारे दौरे रद्द हो जाएंगे। अन्ना ने मौनव्रत की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार मौन की भाषा ही समझती है, इसलिए वह मौन धारण करने जा रहे हैं। लेकिन, समझा जा रहा है कि इस मौनव्रत का उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है। सहयोगियों के बड़बोलेपन से तंग आकर ही उन्हें इसके लिए मजबूर होना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों के दौरान अन्ना के कई सहयोगी गलत वजहों से चर्चा में रहे।
कुछ दिन पहले रालेगण सिद्धि में ही अन्ना के निकट सहयोगी सुरेश पठारे के दुर्व्यवहार के चलते बाहर से आए लोगों के साथ उनकी मारपीट हुई। कश्मीर पर विवादास्पद बयान देने के कारण प्रशांत भूषण की दिल्ली में पिटाई कर दी गई। इसके बाद संतोष हेगड़ ने टीम के ही साथी अरविंद केजरीवाल पर ज्यादा बोलने को लेकर टिप्पणी की। इस सबसे अन्ना खिन्न नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मौनव्रत से अन्ना अपने सहयोगियों को संदेश देंगे। साथ ही मीडिया द्वारा सहयोगियों के बारे में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने से भी बच सकेंगे।












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