सपा के पास अब सिर्फ एक स्टार प्रचारक अखिलेश

Akhilesh Yadav
लखनऊ। समाजवादी पार्टी विधान सभा चुनाव के प्रचार में जुटी है लेकिन पार्टी मैनेजर अमर सिंह के न होने से पार्टी के प्रचार में तड़क भड़क नहीं दिख रही है। गत चुनाव में जिस प्रकार फिल्मी सितारे प्रचार में दिखायी दे रहे थे इस बार ऐसा कुछ भी नहीं है। सपा के पास अब मुख्य प्रचारक के तौर सिर्फ एक ही नाम अखिलेश यादव का है जो स्वयं चुनावी सभाएं कर अपने व पार्टी के लिए वोट मांग रहे हैं।

युवाओं की अगुवाई करते हुए सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव रथ लेकर निकल पड़े हैं लेकिन कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं ला पा रहे हैं। हमेशा से फिल्मी सितारों की चकाचौंध से घिरी रहने वाली सपा इस चुनाव में सन्नाटे में है। प्रदेश में चुनावी जंग जीतने के लिए तैयार सपा ने सबसे पहले प्रत्याशी घोषित करे और चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इस बार प्रचार की कमान सपा के युवराज अखिलेश यादव को सौंपी है।

अखिलेश रथ पर सवार होकर प्रचार के लिए तो निकल पड़े लेकिन उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुटा सके। इस बार सपा को पार्टी के चुनावी प्रचार में फिल्मी सितारों की कमीं जरूर खल रही होगी। फिल्मी सितारे पार्टी के प्रचार में तो आ जाते लेकिन उन्हें लाने वाले पार्टी मैनेजर का पद तो खाली ही है। पद पर विराजमान अमर सिंह ने अब सपा के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है जिसे देखते हुए सितारे पार्टी के प्रचार में आने से कतरा रहे हैं। कहा जाता है कि फिल्मी सितारे ही पार्टी के स्टार प्रचारक थे लेकिन इस बार सबकुछ नदारद है।

अमर सिंह के जाने से भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी, अभिनेता संजय दत्त और जयाप्रदा व जयाबच्चन भी अब सपा से दूर हैं। ऐसे में पार्टी के सामने संकट यह है कि वह प्रचार के लिए किसे आगे ताकि आम लोगों की भीड़ पार्टी की सभाओं में दिखायी दे। आजम खां की घर वापसी जरूर हो गयी है लेकिन यह कहा जा रहा है कि पार्टी के भीतर ही लोग उनको पसंद नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सपा के पास पिता-पुत्र के अलावा अन्य कोई स्टार प्रचारक नहीं है।

टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में असंतुष्टों की संख्या भी बढ़ गयी है। सपा मुखिया मुलायम सिंह लगातार कार्यकर्ताओं को यह समझा रहे हैं कि किसी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा तथा सरकार बनने के बाद सभी को पूरा सम्मान मिलेगा और अभी कार्यकर्ता मिलकर कार्य करें। इतिहास गवाह है कि गत विधानसभा चुनाव के बाद हुए सभी उपचुनाव में सपा को नुकसान ही हुआ है। यहां तक कि पार्टी अपनी बहू को भी सीट नहीं दिला सकी। लोकसभा चुनाव में आपसी खींचतान व मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी के चलते सपा को खासा नुकसान हुआ।

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