राहुल गांधी दलित के यहां ही खाना क्यों खाते हैं?

दरअसल जब से राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को निशाना बनाया है तब से वे इसी कॉसेप्ट पर काम कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदा उन्होंने यूपी की राजनीति में सर्वे भी करवाए हैं। जिससे उन्होंने यह जानने की कोशिश की है कि यूपी में जातिगत वोटों का आधार क्या है। उनके सर्वे में जो बाते सामने आई हैं उसमें ग्रामीण इलाकों का वोटिंग परसेंटेज शहरी इलाकों के वोटिंग परसेंटेज से भी ज्यादा रहा है। इतना ही नहीं राज्य में जिन समुदायों को पिछड़ा माना जा रहा है उनमें भी वोटिंग की परसेंटेज बाकी ऊचे समुदायों से काफी ज्यादा है।
इस बार राहुल गांधी अपने दौरे से यह संदेश भी देना चाह रहे हैं कि वे और उनकी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ है। किसानों को रिझाने के लिए राहुल गांधी खाद के एक स्टोर में जा पहुंचे। जहां किसानों ने उन्हें खाद की कालाबाजारी की शिकायत की थी। राहुल इस बार ग्रामीण इलाकों का दौरा कर वोटरों की नब्ज थामने का काम कर रहे हैं। यूं कहें कि वे मायावती की राह पर चलकर ही उन्हें चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे मिशन में जिस चीज की कमी रह रही है वह यह है कि उनके स्थानीय नेताओं को इसमें शामिल नहीं किया जा रहा है। इतना साफ है कि यूपी के चुनावों में इन स्थानीय नेताओं को ही चुनावें में जोर आजमाना है न कि राहुल गांधी को इसका हिस्सा बनना है।












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