धनंजय सिंह को नहीं मिलेगी सुरक्षा

पिछले दिनों जौनपुर के बसपा सांसद धनंजय सिंह को बसपा सुप्रीमों ने पार्टी से बाहर कर दिया। पार्टी से निकाले जाने के बाद धनंजय ने बयान दिया कि उनकी जान को खतरा है। इसके कुछ समय उपरान्त उन्होंने कहा कि उन्हें यूपी पुलिस के आला अधिकारी से जान का खतरा है तथा उपरोक्त अधिकारी उनकी हत्या करवा सकते हैं। इसके बाद वह अपनी सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो गए। धनंजय सिंह के इस आरोप के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित सांसद धनंजय सिंह की सुरक्षा हटा लिये जाने का निर्णय सुना दिया। सुरक्षा हटाए जाने के बाद डरे सहमे दबंग सांसद ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपील की कि उनकी सुरक्षा हटायी न जाए।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति भारती सप्रू की खंडपीठ ने सांसद की सुरक्षा बहाल करने पर कोई फैसला नहीं दिया, लेकिन राज्य सरकार से यह जवाब देने को कहा कि उनकी सुरक्षा क्यों हटाई गयी। याचिका में सांसद ने कहा था कि उस पर चार अक्टूबर 2002 को एके 47 तथा एके 56 से लैस अपराधियों ने हमला किया था। इस हमले में उन्हें गंभीर चोट आयी थी तथा उनके एक साथी की आंख की रोशनी चली गयी थी। अब पिछले महीने बसपा से निलंबित किये जाने के बाद उनकी सुरखा वापस ले ली गयी है। फिलहाल कोर्ट ने सरकार से मामले में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगी।












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