दिल्‍ली: इमरजेंसी लाइट में हुआ मरीजों का इलाज

Delhi: Patients treated in Emergency Lights
दिल्ली (ब्यूरो)। बिजली बचाने के लिए टीवी पर विज्ञापन चलता रहता था कि अगर हमने बिजली बचाने पर ध्यान नहीं दिया तो एक दिन अस्पतालों में आपरेशन लालटेन में करना पड़ेगा। यह हालात वाकई पैदा हो गए हैं। दिल्ली के दूसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में किसी ग्रामीण मेडिकल सेंटर की तरह इमरजेंसी लाइट की रोशनी में मरीज देखे गए। केबल फॉल्ट की वजह से जीटीबी अस्पताल में पूरे दिन बिजली गुल रही, लिहाजा जैसे तैसे कर डॉक्टरों ने मरीजों का उपचार किया। आपातकालीन सेवाएं और ओटी जेनरेटर के भरोसे चलाए गए, लेकिन ओपीडी सेवाएं अंधेरे में चलानी पड़ी।

जीटीबी अस्पताल को बिजली आपूर्ति करने वाली मेन लाइन में खराबी की वजह से सुबह से ही पूरे अस्पताल की बिजली गुल रही। जरूरी सेवाएं जेनरेटर के सहारे चली, लेकिन ओपीडी में अंधेरा ही पसरा रहा। कुछ डॉक्टर मोबाइल टार्च का सहारा मरीज देखने के लिए ले रहे थे, तो कुछ कमरों में आने वाली सूरज की रोशनी के सहारे मरीज देख रहे थे।

अस्पताल के पुराने धर्मशाना भवन में चल रहे मनोचिकित्सा, आयुर्वेद और होम्योपैथी विभाग का तो सबसे बुरा हाल रहा। यहां पर डॉक्टर किसी पिछड़े ग्रामीण मेडिकल सेंटर की तरह इमरजेंसी टार्च के सहारे मरीज देखते नजर आए। सेकेंड सेटेरडे और संडे के बाद खुले अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ थी। लिहाजा अस्पताल में बिजली की कोई पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था न होने से डॉक्टर और मरीज दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल में बिजली सप्लाई के लिए लगाए गए जेनरेटर भी पुराने पड़ चुके हैं और मौजूदा लोड के हिसाब से नाकाफी है।

इसी वजह से बिजली कटौती के दौरान केवल इमरजेंसी सर्विसेज को ही बिजली मिल पाती है, जबकि पूरा अस्पताल अंधेरे में डूबा रहता है। दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पतालों में एक जीटीबी अस्पताल की यह हालत प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि बिजली व्यवस्था को पूरी तरह से मंगलवार तक ही दुरुस्त किया जा सकेगा। हालांकि दोपहर बाद नई वैकल्पिक केबल डालने के बाद स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजपाल भी बिजली कटौती की बात स्वीकार की और कहा कि डॉक्टरों ने नेचुरल लाइट के सहारे काम किया।

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