10 हजार की कीमत वाला एके-47 बिका 3.10 लाख में

वहीं दूसरी ओर देखा जाए तो इसी धार्मिक संगठन ने 'एके-56' जैसे बहुचर्चित नम्बर को भी अपने नाम से ही पंजीकृत करवाया है। चण्डीगढ़ के पंजीकरण एवं लाइसेंस प्राधिकरण (आरएलए) ने वाहनों की आकर्षक नंबरों की नीलामी शुरू की थी। नीलामी प्रक्रिया से प्राधिकरण को 48 लाख रुपये मिले. शुक्रवार को 93 नम्बरों के लिए बोली लगाई गई थी। इस प्रक्रिया के दौरान 0007 नम्बर की नीलामी 4.21 लाख रुपये में हुई तो 0005 की बोली 3.25 लाख रुपये लगाई गई। 0001 नम्बर की बोली 3.1 लाख रुपये लगाई गई।
प्राधिकरण के मुताबिक 'सीएच-01-एच' श्रृंखला के नम्बरों की नीलामी सात लाख रुपये से शुरू हुई। इस श्रृंखला के 0001 नम्बर की नीलामी सात लाख रुपये, 0009 की और 0007 की 4.5 और 4.25 लाख रुपये में की गई। आरएलए के एक अधिकारी ने कहा, "लोगों के अंदर वीआईपी और आकर्षक नम्बरों को हथियाने का जूनून सवार है। प्राधिकरण प्रति दो-तीन महीनों में इन नम्बरों की बोली लगाकर काफी राजस्व जुटा लेता है। चण्डीगढ़ के निवासी नरेंद्र सिंह शेरगिल ने पिछले साल मई में अपने गाड़ी का नम्बर 0001 रखने के लिए 10 लाख रुपये की बोली लगाई थी, जो अब तक की सबसे अधिक है।












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