दिल्ली: हेलमेट से महिलाओं को क्यों मिले छूट

परिवहन विभाग अधिकारियों के अनुसार सेंट्रल मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में सिख दुपहिया चालक हेलमेट न लगाने या आप्शनल छूट दी गई है। साथ ही यह कहा है कि राज्य सरकार चाहे तो इन्हें अपने तरीके से छूट दे सकते हैं। इस पर 1999 में दिल्ली सरकार में सिख समुदाय की महिला संगठनों की तरफ से यह मांग रखी गई थी कि धार्मिक परंपरा के कारण हेलमेट पहनने में दिक्कत होती है। यही वजह है कि 1999 में दिल्ली मोटर वाहन नियम, 1993 में संशोधन करके नियम 115 में महिलाओं को हेलमेट पहनने के लिए स्वेच्छा से छूट दी गई है। यानी चाहें तो लगाएं नहीं तो न लगाएं।
सूत्रों के अनुसार परिवहन विभाग के अधिकारी भी इस पक्ष में हैं कि सड़क पर सुरक्षा सबके लिए जरूरी है लेकिन धार्मिक भावना व एक समुदाय की नाराजगी कोई मोल नहीं लेना चाहता। यही वजह है कि दिल्ली सरकार मामला कोर्ट पर छोड़ना चाहती है। इसलिए 19 अक्तूबर को कोर्ट यह विभाग सीधे तौर पर हेलमेट की अनिवार्यता किए जाने को कोई तर्क नहीं रखेगा। उल्लेखनीय है कि पिछली सीट पर अगर कोई पुरुष बैठता है तो हेलमेट लगना अनिवार्य है जबकि महिला को बिना हेलमेट बैठने की छूट है। इस पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस भी पहले आपत्ति जता चुकी है। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि हम चाहते हैं कि इस मामले में कोर्ट ही फैसला ले।












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