भारतीय रिजर्व बैंक के नाम पर फर्जीवाड़ा

RBI
याहू, एमएसएन, माईक्रोसॉफ्ट, आदि बड़ी-बड़ी मल्‍टीनेशनल कंपनियों के नाम पर लॉटरी के ढेरों ई-मेल आपके पास आते होंगे। ई-मेल पढ़ते ही आप समझ जाते होंगे कि यह बेवकूफ बनाने का तरीका है, या यूं कहिये किसी के अकाउंट को हैक करने के लिए फैलाया गया एक जाल है। लेकिन क्‍या आपको पता है, अब इस फर्जीवाड़े में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का भी नाम आ गया है। पढ़ें अजय मोहन की रिपोर्ट-

जी हां भारतीयों को 5 लाख ब्रिटिश पाउंड का लालच देकर उनके बैंक अकाउंट डीटेल्‍स प्राप्‍त करने के लिए यह जाल अब आरबीआई के नाम पर बिछाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस फर्जीवाड़े में यह तक कहा गया है कि लॉटरी के विजेता को यह राशि आरबीआई के गवर्नर डा. डी सुब्‍बाराव के आदेश पर दी जायेगी। यह पढ़कर आप यह जरूर सोच रहे होंगे, क‍ि नोट छापने वाले आरबीआई का इस्‍तेमाल फर्जीवाड़े में कैसे हो सकता है।

अब हम आपको फर्जीवाड़े की कहानी बताने जा रहे हैं। हमारे पास एक ई-मेल आया, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से भेजा गया था। उसमें लिखा था कि आपने रिजर्व बैंक के लॉटरी सिस्‍टम में पांच लाख रुपए जीते हैं। इसके साथ एक एटैचमेंट था, जिसे भरकर रिप्‍लाई देने को कहा गया था। हमने अटैचमेंट खोला तो चौंका देने वाले तथ्‍य सामने आये। मेल में लिखा था, "आपने 2010 में 5 लाख पाउंड जीते थे, जो आपको देना है। हाल ही में आरबीआई के गवर्नर डा. डी सुब्‍बाराव ने मुंबई शाखा में सीनेट टैक्‍स कमेटी के साथ एक मीटिंग में यह आदेश दिये थे कि सभी का बकाया धन उन्‍हें दे दिया जाना चाहिये। इसलिए हम डा. सुब्‍बाराव के आदेश पर आपको 5 लाख पाउंड दे रहे हैं। इसके लिए आपको हमें 10,500 रुपए देने होंगे।" मेल में नीचे नाम, पता, उम्र, बैंक का अकाउंट नंबर, फोन नंबर, आदि मांगा गया।" मेल भेजने वाले के पते में आरबीआई के दिल्‍ली कार्यालय का पता दर्शाया गया (ईमेल को पढ़ने के लिए क्लिक करें)

इतना पढ़ने के बाद आप समझ ही गये होंगे क‍ि यह सब फर्जी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि भारत के हर सरकारी व निजी बैंकों को नियंत्रित करने वाले व करंसी नोट जारी करने वाले आरबीआई का इस्‍तेमाल कोई इतनी आसानी से कैसे कर सकता है। चलो एक बार बैंक का नाम इस्‍तेमाल कर भी लिया, लेकिन यह कहना कि इस संबंध में गवर्नर ने एक मीटिंग बुलाई और पैसा रिलीज करने के आदेश दिये, यह कितना सही है? सही मायने में देखा जाये तो यह आरबीआई के साथ हो रहा घटिया मजाक है। उस गवर्नर के नाम का मजाक है, जिनके हस्‍ताक्षर भारतीय करंसी नोट पर होते हैं।

हमें जब यह ई-मेल मिला तो हमने उसे आरबीआई की वेबसइट के माध्‍यम से आरबीआई की कंप्‍लेंट सेल भेज दिया। यदि आपको ऐसा कोई भी ई-मेल मिले तो सबसे पहले आरबीआई को सूचित करें, ताकि सही समय पर ऐक्‍शन हो और ऐसी ई-मेल भेजने वालों को पकड़ा जा सके।

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