भाजपा को भी चाहिए अब मुस्लिमों को सहारा

राज्य की राजनीति के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि वर्ष 1991 में जब भाजपा ने हिन्दू व हिन्दुत्व कार्ड खेला तो यूपी की सत्ता नसीब हुई। इसके बाद वह दौर नहीं आया जब भाजपा का उत्थान होता। वर्ष 1996 से लगातार पार्टी का पतन हो रहा है। भाजपा की जिन विरोधी पार्टियों ने यूपी मुस्लिमों का दामन थामा व सत्ता के करीब बढ़ती चली गयीं इसमें मुस्लिमों की चहेती पार्टी सपा ने सत्ता का रस लिया। भाजपा का मुस्लिमों की ओर झुकाव उस वक्त भी दिखायी दिया जब पार्टी के कट्टर हिन्दूवादी नेता लाल कृष्ण आडवाणी जब पाकिस्तान दौरे पर गये उन्होंने अपनी मुस्लिम विरोधी छवि तोडऩे का प्रयास किया और मुहम्मद अली जिन्ना को सेकुलर बताया।
हालांकि इसके बाद देश में काफी हंगामा हुआ शायद यही कारण रहा कि भाजपा इस मुद्दे को भुना नहीं सकी। पार्टी ने उसके बाद से रणनीति बदली और मुस्लिमों को रिझाने का सिलसिला आरम्भ किया। कभी मुसलमानों के कल्याण की बात होने पर भड़क जाने वाले नेता व पार्टी के राष्टi्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र ने पिछले दिनों अल्पसख्ंयक सम्मेलन में कहा कि हम सबके लिए न्याय की बात करते हैं। अब पार्टी के सभी नेता एक सिरे से मुस्लिम हितों की बात कर रहे हैं उन्हें यह बात पता चल गयी है कि अब सिर्फ हिन्दु वोट के सहारे वह सत्ता हासिल नहीं कर सकते क्योंकि जिस प्रकार भाजपा का वोट प्रतिशत व सीटों की संख्या घटी हैं उससे पार्टी को मस्लिमों की शरण में पहुंचा दिया है।
भाजपा की अब तक विधान सभा सीटें
| वर्ष | सीटें लड़ी | सीटें जीती |
| 1989 | 275 | 57 |
| 1991 | 415 | 221 |
| 1993 | 422 | 177 |
| 1996 | 414 | 174 |
| 2002 | 320 | 88 |
| 2007 | 350 | 51 |












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