इको फ्रेंडली रावण भी मांग रहा जन लोकपाल बिल

रावण बनाने के काम में पिछले 35 साल से लगे प्रवीण ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण को लेकर लोगों में काफी जागरूकता बढ़ रही है और इसी के चलते इस बार करीब 20 - 25 इको फ्रेंडली रावण बनाए गए हैं। हालांकि इस इलाके में हजारों की संख्या में रावण के पुतले बनाए जाते हैं जिन्हें न सिर्फ राजधानी बल्कि आसपास के राज्यों तक में भेजा जाता है। प्रवीण ने बताया कि रावण का पुतला बनाने के लिए सामान्य तौर पर प्लास्टिक, लोहे की तारों, नुकसान पहुंचाने वाले रंगों और तारकोल का इस्तेमाल किया जाता रहा है लेकिन इस साल इन सब चीजों से तौबा कर ली गयी है। यही वजह है कि हानिकारक रसायनों के बजाय फ्लोरोसेंट पेपर, प्राकृतिक रंग और बेंत की खप्पचियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस बार तातारपुर में एक और अनोखी बात देखी जा रही है। सामान्य तौर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का ही पुतला बनाया जाता रहा है लेकिन इस वर्ष बुराई के प्रतीक के रूप में एक चौथा पुतला भी बनाया गया है जिसे दशहरे के दिन तीन अन्य पुतलों के साथ जलाया जाएगा। सुभाष नगर रामलीला कमेटी ने तातारपुर के सुभाष रावण वाले को 50 फुट उंचाई वाला एक चौथा रावण बनाने का आर्डर दिया है जिसकी 16 फुट लंबी मूंछों पर लिखा है, जन लोकपाल बिल लाओ, भ्रष्टाचार को भगाओ। सुभाष ने बताया कि यह किसी पुतले की अब तक की सबसे बड़ी मूंछे होंगी।












Click it and Unblock the Notifications