मोंटेक सिंह आज खीचेंगे गरीबी की नई रेखा

आपको बता दें कि योजना आयोग के गरीबी रेखा की नई परिभाषा पर विपक्षी दलों और आम जनों ने योजना आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, उससे आहलूवालिया खासे नाराज हैं। योजना आयोग की तरफ से उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यह समझाने की कोशिश की है कि अभी इस बारे में अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
गौरतलब है कि योजना आयोग की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में यह बताया गया है कि शहरी क्षेत्रों में रोजाना 32 रुपये से ज्यादा कमाने वाले और ग्रामीण क्षेत्र में 26 रुपये से ज्यादा कमाने वाले व्यक्ति को गरीबी रेखा के ऊपर रखा जाएगा। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के दो प्रमुख सदस्यों ने भी इसका जोरदार विरोध किया है।
माना जाता है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी योजना आयोग से कहा है कि वह गरीबी रेखा की परिभाषा को लेकर फिर से विचार करे। योजना आयोग का कहना है कि गरीबी रेखा की परिभाषा अभी तय की जा रही है। इस बारे में एक समिति काम कर रही है। हलफनामे में जो तथ्य बताए गए हैं, वे तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट पर आधारित हैं। आयोग भी इस रिपोर्ट को अंतिम नहीं मानता है और इसकी समीक्षा की जा रही है।
वहीं एक बार फिर रविवार को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य एनसी सक्सेना ने गरीबी रेखा के नीचे गुजर करने वालों की संख्या तय करने के लिए योजना आयोग के मानदंड की तीखी आलोचना की। सक्सेना का कहना है कि कोई भी व्यक्ति 32 रुपये रोजाना पर गुजरा नहीं कर सकता। इतने धन से तो केवल कुत्ते व जानवर ही जी सकते हैं। इससे पहले भी एनएसी के कई सदस्य आयोग के मानदंड को 'घटिया' करार दे चुके हैं।
एनसी सक्सेना ने कहा कि देश में जहां 80 प्रतिशत आबादी गरीबी है, सरकार को उन्हें लाभ पहुंचाना चाहिए तथा बीपीएल निर्धारण के लिए 32 रुपये के विचार से असहमति जताना चाहिए। जो लोग 32 रुपये रोजाना खर्च करते हैं, वह समाज के सबसे गरीब हैं। आप उन्हें दीन-हीन कह सकते हैं, आप उन्हें लोगों की ऐसी श्रेणी में रख सकते हैं जो अमानवीय जीवन जा रहे हैं। गरीबों को बीपीएल लाभ देने का समर्थन करते हुए सक्सेना ने कहा, सरकार को गरीबी रेखा की परिभाषा पर फिर से विचार करना चाहिए।












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