कोश्यारी को मिली उत्तराखंड चुनाव की कमान

उधर, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी भले ही उत्तर प्रदेश में पार्टी की सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हो, लेकिन प्रदेश नेतृत्व इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में उत्तर प्रदेश की चुनावी चर्चा पर पूरी कार्यकारिणी की निगाहें लगी थी। चर्चा भी हुई, लेकिन प्रदेश नेतृत्व के निराशाजनक प्रस्तुतीकरण ने केंद्रीय नेतृत्व के उत्साह पर पानी फेर दिया। गडकरी के पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के आह्वान के सामने प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही पार्टी खाते में 80-90 सीटों का आंकड़ा ही रख सके। उत्तर प्रदेश के लिए भाजपा का मिशन 2012 अभी अधूरा है।
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इसका अहसास भी हो गया है। गडकरी ने उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के विरोध के बावजूद सबसे बेहतरीन टीम जुटाई है। उमा भारती की पार्टी में संजय जोशी की संगठन में सक्रिय वापसी के लिए गडकरी को कितने पापड़ बेलने पड़े। इसके अलावा राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र के साथ सौदान सिंह को भी मोर्चे पर तैनात किया गया है। इसके बावजूद कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश संगठन राज्य में सरकार बनाना तो दूर उसका सपना भी नहीं दिखा सका।












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