लोकपाल के दायरे में नहीं आना चाहते सीबीआई व सीवीसी

संसद की स्थायी समिति के सामने सीबीआई निदेशक एपी सिंह और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार ने अपने को लोकपाल के दायरे में लाने का पुरजोर विरोध किया। इन दोनों अधिकारियों का तर्क था कि किसी भी कीमत पर लोकपाल के दायरे में उन्हें नहीं लाया जाना चाहिए। हालांकि इन्होंने इस संस्थाओं को विखंडित करने बदले आपराधिक न्याय प्रक्रिया को मजबूत और प्रभावशाली बनाने की आवश्यकता जरूर बतायी।
संसदीय समिति के सामने अपना पक्ष रखते हुए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार ने कहा कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए शीर्ष ब्यूरोक्रेसी को सीवीसी के मातहत बने रहने देना चाहिए तथा मौजूदा निगरानी तंत्र के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकपाल में सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है जबकि सीवीसी के पास दंडात्मक के साथ निषेधात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। लोकपाल के दायरे में सिर्फ शीर्ष ब्यूरोक्रेसी को लाने की बात हो रही है जबकि सीवीसी सभी श्रेणी के अफसरों के भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करता है।
सीबीआई के निदेशक एपी सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए एक मजबूत और प्रभावी लोकपाल बनाना चाहिए, लेकिन सीबीआई को इसके दायरे में लाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा सीबीआई को विखंडित करने के बजाय उसे और अधिक सशक्त बनाने की जरूरत है। सीबीआई के निदेशक का कार्यकाल पांच साल या 65 साल की उम्र सीमा तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीबीआई को अधिक स्वायत्तता व संसाधन देकर और अधिक मजबूत बनाने से भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी।अब देखना है कि समिति क्या फैसला करतीहै।












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