क्यों बदनाम हुआ व्रत में खाया जाने वाला कुट्टू?

नवरात्रि के पहले दिन कुट्टू का आटा खाने से हरियाणा में छह लोग बीमार पड़े। दूसरे दिन यूपी, दिल्ली मिलाकर संख्या 50 हो गई और आज 100 के ऊपर। सरकारी और निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार के बाद ज्यादातर लोगों को छुट्टी दे दी गई। लेकिन कई केस ऐसे आये जिनमें मरीज के पेट में तीव्र दर्द होने की वजह से भर्ती करना पड़ा। कुट्टू के आटा की पूड़ी, पराठा, रोटी आदि खाते ही उल्टी, दस्त और पेट में दर्द के कारण मरीजों में दहशत का माहौल बन गया है। इस बीच, कुट्टू के आटे के आतंक से स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ गई और बाजारों में छापेमारी शुरू हो गई।
क्या होता है कुट्टू
कुट्टू के आटा पर ताज़ा स्थिति के बाद बात आती है इसके बारे में जानने की। हजारों लोग जो इसका इस्तेमाल व्रत में करते हैं, वह नहीं जानते कि आखिर कुट्टू क्या होता है। हो सकता है आपको भी ना मालूम हो। चलिये हम बताते हैं। कुटटू एक प्रकार का पौधा है, जिसकी बहुत सी नस्लें हैं। अधिकतर नस्लें जंगली हैं। कुट्टू पौधे के सफेद फूल से निकलने वाले बीज को पीस कर इसका आटा तैयार किया जाता है। जिसे आमतौर पर सभी लोग कुटटू का आटा बोलते हैं। इसे खाततौर पर व्रत में इसलिए इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि ना यह अनाज है और न ही वनस्पति। यह एक घास परिवार का सदस्य है।
वनस्पति विज्ञान के मुताबिक यह पॉलीगोनाइसी फैमिली का होता है। इसका वनस्पति नाम फागोपिरम एस्कुलेंटम होता है। अंग्रेजी में कुटटू को बकव्हीट कहते हैं। इसे पंजाब में ओखला बोला जाता है। यह जंगली इलाकों में ही पाया जाता है। इसकी सबसे ज्यादा पैदावार रूस में होती है। उसके बाद चीन, यूक्रेन, फ्रांस और कई अन्य देश। भारत के करीब देखें तो सबसे ज्यादा भूटान के जंगली इलाकों में इसकी पैदावार है। यह एक जड़ीबूटी है, जिसे ब्लडप्रेशर, मधुमेह, आदि की दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।
क्यों बदनाम है कुट्टू
दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कुट्टू अपने रासायनिक व्यवहार के कारण बदनाम है। डॉक्टारों के अनुसार कुटटू का आटा गरम होता है। इससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है। कुटटू में वसा अधिक होती है। इसका सावधानी से प्रयोग किया जाना चाहिए इसके आटे का प्रयोग अधिकतम एक माह तक उपयोग में लाया जा सकता है। जहां तक हो सके ताजा आटा ही प्रयोग करना चाहिए।
आटे में बैक्टीरिया और फंगस लग जाते हैं। कुटटू का आटा ज्यादा दिनों तक रखे होने की स्थिति में माइक्रोटाक्सिन का निर्माण हो जाता है, जोकि शरीर के लिए हानिकारक है। खराब कुटटू के आटे को खाने से उल्टी के साथ चक्कर आने लगते हैं। बेहोशी भी आ सकती है। शरीर ढीला पडऩे लगता है। डाक्टरों के अनुसार ज्यादा दिनों तक रखे कुटटू के आटे से बने पकवान खाने से लोग फूड प्वाइजनिंग के शिकार होते हैं।
सही मायने में कुट्टू का आटा खाने से लोगों के अस्पताल तक पहुंचने के जिम्मेदार वो फैक्ट्री वाले हैं, जो खराब कुट्टू को पीसकर आटा बाजार में बेचते हैं। वे लोग जिम्मेदार हैं, जो ठीक से इस आटा की पैकेजिंग नहीं करते और नमीं के संपर्क में आने पर इस आटा में रासायनिक क्रियायें होती हैं और यह जहर बन जाता है।












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