संकट मोचक के कारण संकट में फंसी यूपीए सरकार

बताया जा रहा है कि प्रणब की ताजा चिट्ठी में इस बात पर जोर दिया गया है कि 25 मार्च को वित्त मंत्रालय से पीएमओ भेजा गया नोट दरअसल अंतरमंत्रालयी विचार- विमर्श का हिस्सा था और यह प्रधानमंत्री कार्यालय व कैबिनेट सचिवालय की जानकारी पर आधारित था। वित्त मंत्रालय की दलील है कि चूंकि इस पूरे विवाद पर अलग-अलग कथन सामने आते रहे हैं, लिहाजा 25 मार्च को भेजे गए नोट के सहारे समग्र व एकजुट पक्ष रखने की कोशिश की गई। यह अलग बात है कि यह नोट जब सामने आया तो विवाद का सबब बन गया। इसे बुधवार को सरकार और संगठन के स्तर से मुखर्जी-चिदंबरम के बीच तकरार की धारणा तोड़ने की कोशिश माना जा रहा है।
कांग्रेस में अंदरखाने वित्त मंत्रालय का 25 मार्च का नोट हैरानी का सबब है जिसमें कहा गया है कि तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम को 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए जोर देना चाहिए था। नोट का मकसद चिदंबरम को नीचा दिखाना नहीं हो सकता, ऐसी मंशा होती तो मार्च में लिखा गया यह नोट कब का लीक कर दिया गया होता। कांग्रेस और पीएम इस मामले में पूरी तरह चिदंबरम का साथ देकर भाजपा के आरोपों को हवा में उड़ा रहे हैं कि सरकार के अंदर अनबन है। कांग्रेस आधिकारिक रूप से यह मानने को कतई तैयार नहीं है कि सरकार में किसी प्रकार का मतभेद है।
इस बीच प्रणव मुखर्जी से मिलने कई नेता आए। उनके घर पर बैठक भी देर रात तक चलती रही। उस बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायणसामी, संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल, संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ल भी शामिल थे। हालांकि कांग्रेस पार्टी इसे आधिकारिक तौर पर बैठक मानने से इनकार कर रही है। यह भी कहा जा रहा है कि उस बातचीत में 2जी मसला नहीं उठा। फिर भी इस बैठक को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है। खास तौर पर इसलिए भी कि गुरुवार को भी कम से कम दिन के पहले हिस्से में प्रणव मुखर्जी की प्रधानमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाएगी। अब सियासी गलियारे में यह कयास लगाया जा रहा है कि चिदंबरम का भविष्य दादा के हाथ में है।












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