नवरात्रि आज से शुरू- ऐसे करें पूजा?

Maa Durga
चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा से लेकर नवमी तक तथा आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से लेकर नवमी तक, जो दुर्गा का प्रासिद्ध पर्वकाल है, उसे नवरात्र कहा जाता है। यह पूजा परम सिद्धिदायनी है। इसमें नव दिनों तक श्री नवरात्र व्रत किया जाता है। नवरात्र व्रत एवं पूजन कैसे करें आपको बता रहे हैं लखनऊ के ज्‍योतिषाचार्य पं. अनुज के शुक्‍ल। नवरात्र व्रत करने वाले जातकों को नौ दिनों दिनों केवल एक समय अल्पाहार भोजन ग्रहण करना चाहिए। नवरात्र व्रत में जो जातक किसी कारणवश उपवास नहीं कर सकते है, वे यदि सप्तमी, अष्टमी व नवमी इन तीनों तिथियों को व्रत रखें तो उनकी मनोकामना सिद्ध होती है।

एकभक्तेन भक्तेन तथैवायाचितेन च।
पूजनीय जनर्देवी स्थाने-स्थाने पुरे-पुरे।।

आश्विन नवरात्रि इस बार 28 सितम्बर से प्रारम्भ है तथा दुर्गाष्टमी 4 अक्टूबर को एंव नवमी 5 मार्च को है। जो जातक दुर्गा जी के 9 व्रत रखते है, वे परायण 5 अक्टूबर नवमी तिथि को ही करें।

अखण्डदीपक पूर्व-दक्षिण के कोण में रखें।
अखण्डदीपकं देव्याः प्रीतये नवरात्रकम।
उज्जवालये अहं देवि एकचितो घृतव्रतः।।
इस मन्त्र का प्रतिदिन 51 बार जाप करें।

कलष स्थापना मुहूर्त: 28 सितम्बर दिन बुधवार प्रातः 10:15 बजे से 11:45 बजे तक ही शुभ रहेगा।

"न रात्रो स्थापनं कार्यं न च कुम्भाभिषेनचनम"
नवरात्रि में कलश स्थापना नहीं करना चाहिए और विसर्जन के पश्चात जल से यजमान का अभिषेक भी नहीं करना चाहिए।

नौ दिन का भोग:

1-नवरात्र के प्रथम दिन मां दुर्गा को गाय के घी में मिश्री मिलाकर भोग लगाने से शरीर निरोग रहता है तथा धन-धान्य में वृद्धि होती है।

2- नवरात्र के द्वितीय दिन यदि कोई जातक मां दुर्गा को शक्कर व मुनक्का को भोग लगाता है तो उसकी आयु में वृद्धि होती है। एंव उसके कैरियर में प्रगति होती है।

3- नवरात्र के तृतीय दिन दूध व दही का भोग मां भगवती को अर्पित किया जाय तो, उस जातक के परिवार में सुख व शांति बनी रहेगी।

4- नवरात्र के चतुर्थ दिन यदि कोई व्यक्ति मां भगवती को बादाम को भोग अर्पित करता है, तो उसके बुद्धि का विकास होता है एंव उसके व्यवसाय में प्रगति होती है।

5- नवरात्र के पांचवें के दिन केले व सेब फल का भोग मां दुर्गा को लगाया जाये तो उस जातक के परिवार में सुख व समृद्धि बनी रहती है।

6- नवरात्र के छठे दिन यदि दूध में शहद मिलाकर मां भगवती को भोग लगाया जाये, जिससे नौकरी में प्रगति होती है तथा परिवार में आपसी सामंजस्य बना रहता है।

7- नवरात्र के सातवें दिन मां भगवती को गुड़ व छुआरे का भोग लगायें तथा गरीबों को भोजन कराने से अचानक विपत्तियों से मां रक्षा करती है तथा बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है।

8- नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा को नारियल के पानी से भोग लगायें तथा नारियल का दान कर ब्राह्रण को दक्षिणा देंने से सन्तान का शारीरिक व मानसिक विकास होता है एंव आर्थिक प्रगति होती है।

9- नवरात्र के नवें दिन मां भगवती को जो जातक तिल के लडडुओं का भोग लगाता तथा श्रद्धा पूर्वक दान करता है, उसके परिवार में अकाल मृत्यु एंव आकस्मिक दुर्घटना नहीं होती है।

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