जैतापुर परमाणु परियोजना में देरी की संभावना: परमाणु उर्जा विभाग

हालांकि इनमें कुछ देरी आएगी लेकिन मल्होत्रा ने कहा कि उर्जा की भारी मांग को देखते हुए परमाणु उर्जा का उपयोग अनिवार्य है। फुकुशिमा जैसी कुछ घटनाओं को छोड़कर परमाणु आधारित संयंत्र सुरक्षित है। उन्होंने कहा तापीय संयंत्र की तुलना में इन संयंत्रो में 20,000 गुना कम ईंधन का इस्तेमाल होता है। दीर्घकाल में हमें उर्जा के उत्पादन के लिए तापीय और परमाणु (उर्जा) की जरूरत होगी।
मल्होत्रा ने कहा कि परमाणु उर्जा नियामक बोर्ड और एनपीसीआईएल सुरक्षा के सारे पहलुओं को ध्यान में रखता है। जरूरी सिफारिशें और बदलाव किए गए हैं। कुडनकुलम परियोजना अपने अंतिम चरण में है और हमें उम्मीद है कि अगले दो महीनों में हम महत्वपूर्ण चरण में पहुंच जाएंगे।
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