एडोब सीईओ के बेटे के अपहरण मामले में 3 को उम्र कैद

कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही बचाव पक्ष के वकील हरिराज सिंह और जबर सिंह ने जज से दोषियों की कम उम्र का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की अपील की। वहीं, अभियोजन पक्ष ने इस अपराध को जघन्य अपराध बताते हुए मृत्युदंड देने की अपील की थी। पर कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की मांग को खारिज करते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई। कोर्ट में मौजूद सूत्रों ने बताया कि अदालत के कटघरे में मौजूद तीनों दोषियों के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। उन्हें कड़ी सजा होने का अहसास पहले से ही था। वहीं, अदालत में मौजूद छत्रपाल के परिजन भी सजा का ऐलान होते ही अपने वकीलों से मिलकर खामोशी से अदालत परिसर से बाहर निकल गए।
उधर, अदालत में जहां उसका अपहरण करने वालों का भविष्य तय हो रहा था। वहीं अनंत अपने स्कूल बस में दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए घर लौट रहा था। जब अदालत का फैसला आया तो अनंत अपने घर के बाहर स्कूल बस से उतर रहा था। उसे पता नहीं था कि उसका अपहरण करने वाले उसके छत्रपाल अंकल उम्रकैद की सजा डासना जेल में काटेंगे।
अनंत की मां निधि ने बताया कि वह अदालत के फैसले से बहुत खुश व संतुष्ट हैं। उन्हें इसी सजा की उम्मीद थी। इस पूरे प्रकरण में मीडिया का रोल बहुत अच्छा रहा है। मीडिया के चलते ही शासन-प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस विभाग ने निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ ठोस से ठोस सबूत व दलीलें अदालत में पेश की। छत्रपाल के पिता की उनके घर के सामने ही मदर डेयरी थी। जिस पर वह अक्सर मिलता था। वह पच्चीस से तीस हजार रुपये महीना कमा रहे थे। पता नहीं छत्रपाल की क्यों नियत खराब हो गई। उन्हें छत्रपाल से यह उम्मीद नहीं थी। जब खुलासा हुआ तो वह भी सदमे में आ गई थीं। वह मानने को तैयार नहीं थी कि छत्रपाल ऐसा कर सकता है।












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