कानून मंत्रालय ने थोपी सीबीआई पर 2जी की रिर्पोट

2g spectrum scam
नयी दिल्ली। ऐसा प्रतीत होता है कि अब सीबीआई भी अपनी स्‍वतंत्रता खोती जा रही है आज सीबीआई ने दिल्‍ली की अदालत के समक्ष कहा कि उसे कानून मंत्रालय की उस राय पर विश्‍वास करने के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता जिसमें कहा गया है कि एक कंपनी का दूसरी कंपनी में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी होनी चाहिए तभी उसे एसोसिएट कंपनी कहा जा सकता है।

सीबीआई को कानून मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट स्वीकारने के लिये बाध्य किया जा रहा है। विशेष सरकारी अभियोजक यूयू ललित ने सीबीआई न्यायाधीश ओ पी सैनी के समक्ष कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप तय करते समय इस विचार को सीबीआई के दस्तावेज के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। ललित ने कहा कि कानून मंत्रालय की रिपोर्ट को विभाग या एक अधिकारी की राय के रूप में लिया जा सकता है लेकिन रिपोर्ट को विश्‍वसनीय दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने 19 सितंबर को सीबीआई को कानून मंत्रालय की रिपोर्ट जमा करने को कहा था। स्पेक्ट्रम घोटाले में फंसी रिलायंस टेलीकाम तथा स्वान टेलीकाम प्राइवेट लि. अपने बचाव में यह कह रही है कि वे एसोसिएट कंपनी नहीं है क्योंकि आरटीएल की एसटीपीएल में हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम है।

गौरतलब है कि 2जी मामले में केंद्र सरकार लगातार फंसती चली जा रही है। चिदंबरम के घेरे में आने के बाद सरकार की समस्‍याएं और भी बढ़ गई हैं। ऐसे में कानून मंत्रालय के इस कदम पर विपक्षी दल यूपीए को घेरे में ले सकते हैं।

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