आडवाणी को अब भी प्रधानमंत्री बनने की आस

अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए आडवाणी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार को घेरने के लिए रथयात्रा निकालने का ऐलान किया था। जिस पर संघ ने अपनी नाराजगी जताकर यह साफ कर दिया कि वह आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं है। लाल कृष्ण आडवाणी अपनी रथयात्रा पर संघ का समर्थन जुटाने के लिए मोहन भागवत से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के बाद जब पत्रकारों ने आडवाणी से पीएम इन वेटिंग के बारे में पूछा तो उन्होंने अपनी दावेदारी से इंकार नहीं किया।
जिन्ना प्रकरण से पहले आडवाणी ही भारतीय जनता पार्टी के बड़े निर्णय लेते थे। अटल बिहारी के राजनीति से बाहर होने और आडवाणी द्वारा जिन्ना की तारीफ करने से संघ ने पार्टी में उनकी भूमिका कम कर दी। उन्हें लोकसभा में विपक्ष नेता पद से हटा दिया गया। इसके बाद अध्यक्ष पद पर नितिन गडकरी की ताजपोशी कर संघ पहले ही यह संकेत दे चुका है कि वह धीरे-धीरे आडवाणी को सक्रिय राजनीति से अलग करने का मन बना चुका है।
आडवाणी जानते हैं कि पहली बार रथयात्रा निकालकर ही उन्होंने पार्टी में अपना वर्चस्व बनाया था। साथ ही बीजेपी को केंद्र में स्थापित किया था। इस समय पार्टी में उनकी भूमिका और अधिकार कम कर दिए गए हैं। ऐसे में आडवाणी प्रधानमंत्री बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए रथयात्रा का सहारा ले रहे हैं। पार्टी में कोई भी बड़ा नेता उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखकर संतुष्ट नहीं है। ऐसे में उन्होंने रथयात्रा की घोषणा कर संघ से भी पंगा ले लिया है।












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